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नदी की संरक्षा कर प्राणियों के जीवन की सुरक्षा करें : प्रकाशानंद महाराज

 

गंगा स्वच्छ रखने को दिलाया गया संकल्प

(अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। गुजरात से आए स्वामी प्रकाशानंद महाराज ने कथा प्रवचन के दौरान दुर्गा सप्तशती के दुर्गा कवच का उद्धरण दिया। कहा कि स्वयं देवी जी की वाणी है कि जब तक धरती, पहाड़ व नदियां सुरक्षित व स्वच्छ रहेगी, तभी तक मैं प्राणियों की रक्षा कर पाऊंगी। अतः हम मनुष्यों का यह परम कर्तव्य है कि तन, मन, धन से देव नदी की संरक्षा कर प्राणियों के जीवन की सुरक्षा करें।
नई झूंसी स्थित स्वामी योगानंद आश्रम में महंत चिद्धानंद गिरी महाराज के निर्देशन में 8 अप्रैल से चल रहे श्रीमद् भागवत कथा का समापन गुरुवार को प्रकाशानंद महाराज ने किया। समारोह में महंत स्वामी चिद्धानंद गिरी एवं कथा वाचक उत्तराधिकारी स्वामी प्रकाशानंद गिरी ने गोकर्ण उपाख्यान की विस्तार से चर्चा करते हुए गंगा नदी को स्वच्छ रखने के लिए राजेश शर्मा संयोजक नमामि गंगे द्वारा गंगा स्वच्छता का संकल्प भी दिलाया।
राजेश शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर गुजरात और अमेरिका बेल्जियम आदि स्थानों से लगभग 500 श्रद्धालु कथा श्रोतागण यहां उपस्थित रहकर कथा का रसास्वादन प्राप्त किए। नगर वासियों सहित तमाम श्रद्धालु और अनेक आश्रमों में से आए लोग प्रसाद ग्रहण कर अपने जीवन को कृतार्थ करते रहे हैं। भागवत कथा में गुजरात से आए सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रयागराज महिमा, अवतार रहस्य श्री कृष्ण जन्मोत्सव गोपी प्रसंग परीक्षित प्रसंग के साथ ही साथ गंगा दर्शन एवं पूजन का लाभ प्राप्त किया। आयोजक मंडल के सदस्य बाबू भाई, विनोद भाई, आश्रम व्यस्थापक नरेन्द्र भाई ने कार्यक्रम को सफल बनाया। अंतिम दिन नेहरू ग्राम भारती मानित विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ आदि नाथ ने स्वामी योगानंद के उद्देश्य व जीवनी को चरितार्थ करते हुए गंगा को पवित्र बनाने का आवाहन किया।

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