जो सबका कल्याण करते हैं, वह भगवान शिव हैं- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द जी

इटावा (अनुराग दर्शन समाचार )। जनपद के मीना बाग, डुँगरी, पीएसी के पीछे श्री अनिल कुमार गुप्त एवम् श्रीमती मीना गुप्ता के मुख्य यजमानत्व में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह एवम् शिव परिवार स्थापना के कार्यक्रम में पधारे सनातन धर्म के सर्वोच्च धर्मगुरु श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर यति सम्राट् अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने उपस्थित सनातन धर्मावलम्बियों को अपना आशिर्वाद एवम् मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि जो सबका कल्याण करते हैं, वह भगवान शिव हैं | विषमता में समता मात्र शिव परिवार में ही दृष्टिगोचर होती है | आज यहाँ शिव परिवार की स्थापना सम्पन्न हुई है | शिवलिंग या किसी भी देवी-देवता की मूर्ति घर में स्थापित करने से पहले ये हमेशा याद रखें कि मूर्ति या शिवलिंग का माप ( अंगुष्ठ प्रमाण ) यानी अपने अंगूठे से ज्यादा बड़ा का नही होना चाहिए। मूर्ति जितनी छोटी होगी, गृहस्थ को पूजा की तुरन्त सिद्धि की प्राप्ति होती है। शिव लिंग को घर में नही रखना चाहिए, अपितु घर से पृथक ईशान कोण में अलग से एक छोटा सा शिवालय बनाकर उसमें प्रतिष्ठित कर नित्य पूजा अर्चना करने पर व्यक्ति अनन्त पुण्य का भागी हो जाता है | शिवलिंग को ईशान में स्थापित तो करें, परन्तु प्राण-प्रतिष्ठा और चक्षु दान आदि कभी नही करना चाहिए। शिवलिंग पर प्राण-प्रतिष्ठा करना हमेशा से ही वर्जित माना गया है। शिव स्थापना में नंदी जी की मूर्ति शिव की और मुख किये हुए स्थापित करना अत्यावश्यक होता है, तथा शिव के दाहिनी ओर त्रिशूल स्थापित करना चाहिए । उसके साथ-साथ अन्य शिवप्रिय वस्तुओं का समावेश अवश्य करना चाहिए। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि वैशाख, ज्येष्ठ तथा आषाढ़, श्रावण, माघ, फाल्गुन महीनों में महादेव जी की प्रतिष्ठा हर प्रकार से सिद्धि देने वाला माना जाता है। ऋतुओं की दृष्टि से हेमंत ऋतु में महादेव यानी शिव लिंग की प्रतिष्ठा से यजमान और भक्तों को विशेष ज्ञान की प्राप्ति होती है। शिशिर में शुभ, किन्तु बसंत ऋतु में शिव मंदिर की प्रतिष्ठा विशेष धनदायक साबित होती है, जबकि ग्रीष्म ऋतु में यह प्रतिष्ठा शांति, शीतलता और विजय प्रदाता होती है। भगवान शिव के परिवार की प्रतिष्ठा यहाँ सम्पन्न हुई है, यहाँ आने वाले भक्तों की हर मनोकामना निश्चित रूप से पूर्ण होगी | क्योंकि भगवान शिव “आशुतोष” अर्थात् शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं | इस अवसर पर भारी संख्या में सनातन धर्मावलम्बियों के साथ नैमिषारण्य से पधारे प्रख्यात श्रीमद्भागवत कथावाचक कमलेश जी महाराज, अनिल कुमार गुप्ता पत्नी मीना गुप्ता दीपू तिवारी, रमाशंकर, दिलीप चौधरी अतुल जी, प्रभाकर तिवारी प्रमुख रूप से उपस्थित थे |
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