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गूगल नही हो सकता गुरू : डा शांति सुंदरम

गुरू विरागी तो शिष्य साधक : आचार्य राजेश मिश्र धीर

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। । शिक्षकों के मौलिक संगठन ‘वॉइस ऑफ टीचर्स’ (वोट) एवं श्री हर्ष सावित्री संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, प्रयागराज की ओर से शिक्षक दिवस के उपलक्ष्य में ‘गुरु-शिष्य परंपरा : दशा और दायित्व’ विषय पर एक दिवसीय राष्टीय वेबिनार का आयोजन मंगलवार को किया गया।
वेबिनार का उद्घाटन ‘वोट’ के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य राजेश मिश्र ‘धीर’ मंगलाचरण श्लोक से किया। उन्होंने कहा कि ‘गुरु शिष्य परंपरा में गुरु और शिष्य के श्रेष्ठ दायित्व का स्पष्ट विभाजन होता था, गुरू का स्थान ईश्वर के समकक्ष था तो शिष्य भी इस ज्ञान के लिए गुरु पर बलिदान हो जाता था। गुरु को जहां विरागी होना चाहिए वहीं शिष्य को साधक परंतु आज गुरु-शिष्य परंपरा का क्षरण हुआ है, दशा में उत्तरोत्तर पतन हो रहा है, इसे पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता है। वेबिनार में मुख्य वक्ता इविवि की विभागाध्यक्ष डॉ. शांती सुंदरम ने कहा कि ‘मां प्रथम गुरु, पिता द्वितीय, आचार्य तृतीय जबकि अतिथि जो वाह्य चुनौती है चौथी गुरू होता है।’ उन्होंने कहा कि “आज गूगल को भी गुरु के रूप में स्वीकार कर लिया गया है जबकि बच्चे का मानस इतना परिपक्व नहीं होता कि वह उस पटल से अच्छी चीजें ही ले सके।”
कार्यक्रम में डॉ. प्रद्युम्न सिंह ने कहा कि ‘गुरु को सद्गुरु होना चाहिए जिसके सानिध्य में शिष्य का सम्पूर्ण कल्याण हो सके। डॉ. शिवम वर्मा नें संस्था के संदर्भ में अपने विचार रखते हुए बताया कि ‘शिक्षक-शिक्षक में भेद समाप्त करते हुए शिक्षक- परिमार्जन, शिक्षक-सम्मान और शिक्षक-अधिकार के प्रति शिक्षकों को सचेष्ट करना और इस हेतुक संघर्ष करना ही संस्था का मूल उद्देश्य है। कार्यक्रम के संचालक दीपक कुमार सिंह ने संस्था के संस्थापक अध्यक्ष आचार्य राजेश मिश्र ‘धीर’ का विभिन्न प्रतिष्ठित मंचों पर हुए सम्मान के लिए हर्ष व्यक्त किया। वेबिनार में डॉ. विवेक पाण्डेय एवं डॉ. नीरज कुमार सिंह नें भी अपने विचार व्यक्त किये। अंत में डॉ. प्रद्युम्न सिंह नें सभी आभार व्यक्त किया। इस वेबिनार में डॉ. रामायण विश्वकर्मा, डॉ. सरिता, आभा शुक्ला, अनुज सिंह, आचार्य सूर्य प्रकाश शुक्ल, आदित्य प्रताप सिंह, आकाश, प्रवीण कुमार पाण्डेय जिला प्रभारी माध्यमिक प्रकोष्ठ सहित अन्य शिक्षक शामिल हुए। वोट की ओर से सभी प्रतिभागियों को प्रतिभाग प्रमाण-पत्र भी प्रदान किया गया।

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