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एक माह की तपस्या परलोक मे आठ अरब चौसठ करोड़ वर्ष तक निवास का अवसर देती है- शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद

प्रयागराज अनुराग दर्शन समाचार मकर संक्रांति का महापर्व 14 और 15 2 दिन पाने की वजह से प्रयागराज के संगम क्षेत्र में डुबकी लगाने का लोगों में आस्था के साथ संगम में स्नान कर रहे हैं । भगवान सूर्य दक्षिणायन की यात्रा समाप्त करके उत्तरायण की राशि ‘मकर’ में प्रवेश करने वाले हैं जिसके फलस्वरूप देवताओं के दिन का शुभारंभ हो जाएगा। इस दिन से सभी तरह के मांगलिक कार्य, यज्ञोपवीत, मुंडन, शादी-विवाह, गृहप्रवेश आदि आरम्भ हो जाएंगे। जो देव प्राण शक्तिहीन हो गये थे उनमें पुनः नई ऊर्जाशक्ति का संचार हो जाएगा और वे अपने भक्तों-साधकों को यथोचित फल देने में सफल हो जाएंगे। काशी सुमेरु पीठ जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने प्रयाग में अनुराग दर्शन के एडिटर इन चीफ से वार्ता करते हुए बताया तीर्थों के राजा प्रयागराज में गंगा स्नान का महत्व है। माघ के महीने में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश काल के समय जब सभी देवों के दिन का शुभारंभ होता है । तो तीनों लोकों में प्रतिष्ठित गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगम तट त्रिवेणी पर साठ हजार तीर्थ और साठ करोड़ नदियां, सभी देवी-देवता, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर आदि तीर्थराज प्रयाग में एकत्रित होकर गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम तट पर स्नान, जप-तप, और दान-पुण्य कर अपना जीवन धन्य करते हैं। तभी इसे तीर्थों का कुंभ भी कहा जाता है। शंकराचार्य स्वामी नरेंद्र आनंद सरस्वती ने कहा मत्स्य पुराण के अनुसार यहाँ की एक माह की तपस्या परलोक में एक कल्प (आठ अरब चौसठ करोड़ वर्ष) तक निवास का अवसर देती है । इसीलिए यहां भक्तजन कल्पवास भी करते हैं।

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