अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण को लेकर बोले- ज्योतिष्ठपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। भगवान शंकराचार्य मंदिर, अलोपीबाग (ब्रह्म निवास) में पूर्व जगद्गुरूशंकराचार्य (गुरूओं) की स्मृति में आयोजित नव-दिवसीय आराधना महोत्सव कार्यक्रम में आज
पूज्य ज्योतिष्ठपीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने गंगा तट बंधवा स्थित श्रीराम जानकी मन्दिर में भगवान श्रीराम, सीता माता, कुँवर लखन लाल और हनुमान जी सहित सभी मूर्तियों पर आरती करके मन्दिर का पाटोत्सव कार्यक्रम सम्पन्न किया।
अयोध्या में श्रीराम मन्दिर निर्माण से सम्पूर्ण विश्व में रामराज्य के स्थापना की कल्पना साकार हो रही है ज्योतिष्ठपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद
उक्त अवसर पर पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “विश्व में रामराज्य की स्थापना की कल्पना
अयोध्या में राम मन्दिर के निर्माण के साथ धीरे-धीरे साकार हो रही है। सम्पूर्ण विश्व मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के कृतित्व एवं आदर्श को स्वीकृति और सम्मान देने लगा है।
उन्होंने बताया कि बंधवा स्थित श्रीराम जानकी मन्दिर का जीर्णोद्धार श्रीमद्ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरू शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी शांतानन्द सरस्वती जी ने वर्ष 1980 में किया था।
उन्होंने बताया कि यह मन्दिर सैकड़ो वर्ष पुराना है। इसीलिए श्रीराम मन्दिर के नाम पर ही वहाँ गंगा जी के घाट का नाम रामघाट रखा गया।
श्रीराम जानकी मंदिर पाटोत्सव में भगवान आदि शंकराचार्य मंदिर में विख्यात संगीत कलाकारों में मनभावन, आध्यात्मिक भजन प्रस्तुत किये। ‘मेरा मिलन करो दो सियाराम से’. सत्यम् शिवम् सुन्दरम्’, ‘गाइये गणपति जगबन्दन’ आदि भजनों से आराधना महोत्सव में आये भक्त भक्ति भाव की गंगा में गोते लगाते रहे और शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती का आशीर्वाद भी लिया।
भजन कार्यक्रम में आध्यात्मिक चैनलों के विख्यात गायक श्री विष्णु राजा और साथी कलाकार रोमा निषाद, राज अग्रहरि, मिथलेश कुमार और विजय आदि ने
अपनी प्रस्तुति दी। भजन-गीत कार्यक्रम में डॉ0 आभा श्रीवास्तव एवं सुशील केसरवानी, उद्घोषक रहे। श्रीमद्भागवत कथा में बोलते हुए व्यास स्वामी श्रवणानन्द जी महाराज ने बताया कि श्रीमद्भागवत महापुराण की कथा का श्रवण करने के साथ-साथ उसमें बताये गये आदर्श कृत्यों का अनुपालन अपने व्यावहारिक जीवन में करने से पुण्य और मोक्ष
प्राप्त होता है।
दण्डी स्वामी विनोदानंद सरस्वती जी, पं0 दयाशंकर पाण्डेय, पूर्व प्रधानाचार्य पं0 शिवार्चन उपाध्याय, आचार्य छोटे लाल, ब्रह्मचारी विशुद्धानंद, ब्रह्मचारी आत्मानंद, ब्रह्मचारी जितेन्द्रानंद, आचार्य विपिन मिश्र, सीताराम शर्मा (जयपुर), अनिल त्रिवेदी, अशोक सिंह, धर्मेन्द्र सिंह, मनीष आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।


