दीपावली पर तांत्रिक व आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष हैं द्विव्य सिद्ध रात्रियां-महंत बजरंगमुनि उदासीन

प्रयागराज। माँ बंगलामुखी उपासक महंत बजरंगमुनि उदासीन ने बताया कि साधना के लिए तांत्रिक व आध्यात्मिक दृष्टि से तीन द्विव्य सिद्ध रात्रियां मानी गई है- प्रथमः- दीपावली महारात्री, द्वितीयः- होलिका महारात्री, तृतियः- शिव महारात्री।
ये तीनों महापर्व आध्यात्मिक व तांत्रिक साधना के लिए सिद्धमानी जाती है। आज साधको केा पूर्ण जानकार गुरू न मिलने के कारण विशेष पर्वो संध्याओं रात्रियों ग्रहण और मुहूर्त आदी महत्वपूर्ण अवसरों की आंतरिक व बाह्य पूर्ण रूप से जानकारी न होने से मंत्र सिद्धी व दैविक शक्तियां प्राप्त होने में मुश्किल होती है। साधना व सिद्धी के लिये विभिन्न मुहूर्त शास्त्रों में सिद्धी प्राप्ति मुहूर्त बताये हैं। परन्तु दिव्य रात्रियां अपने आपमें विशुद्ध शक्तिशाली मुहूर्त है।
दीपावली महारात्रीः– वास्तम में दीपावली एक दिन की न होकर पाँच दिन की है। दीपावली से दो दिन पहले व दो दिन बाद तक यह पर्व माना जाता है अर्थात् धनतेरस से लागू होकर यम द्वितीय तक पाँच रात्री तक रहता है। और यह गुप्त रहस्य बहुत ही कम लोगों को पता है। सिद्धी व लक्ष्मी प्राप्ति के लिये धनतेरस से ही अनुष्ठान प्रारम्भ कर देना चाहिए।।
दीपावली की रात तंत्र शास्त्र की महारात्रि होती है। इसदिन सन्यासी-अघोरी लोग नकारात्मक शक्तियों को सिद्ध कर विजय हासिल करते है। महंत बजरंगमुनि कहते है कि 21वीं सदी में भी डॉक्टर-इंजीनियर जैसे जागरूक लोग तंत्र-मंत्र पर विश्वास करते है। वैज्ञानिक चांद से लेकर मंगल तक पहुंच गए, लेकिन तंत्र-मंत्र की गुप्त विद्या उन्हे विचार करने के लिए विवश कर देती है।दीपावली पर किए गए टोटके प्रभावशाली होते है।।
तंत्रशास्त्र में अनेक विधान हैं जैसे की टोना, टोटका, उपाय, उतारा, साधना सिद्धि आदि। टोना का उपयोग शत्रु के अनिष्ट के लिए होता है।
जबकि टोटका स्वार्थं पूर्तिं के लिए ही किया जाता है। तंत्रशास्त्र का उपयोग त्यौहारों के आते ही आरंभ हो जाता है मगर तंत्रशास्त्र अनुसार दीपावली पर किए गए टोटके अत्यधिक प्रभावशाली होते हैं। दीपावली पर मंत्र जगाए जाते हैं व विशेष सिद्धियों पर विजय पाई जाती है।।संसार की रचना के साथ ही कई चीजों का अविष्कार हुआ है। जैसे-जैसे मनुष्य ने उन्नति की अपने स्वार्थं, पुरुषार्थं, परोपकार के लिए कुछ न कुछ खोजता रहा, ये जिज्ञासा संसार में सदैव प्रबल रही है। कई ऐसे सिद्धिप्रद मुहुर्तं होते हैं जिनमें तंत्रशास्त्र में रुचि लेने वाले तथा इसके प्रकांड ज्ञाता तंत्र-मंत्र की सिद्धि, प्रयोग, व अनेक क्रियाएं करते हैं। इन महूर्तों में सर्वांधिक प्रबल महूर्तं हैं धनतेरस, दीपावली की रात, दशहरा, नवरात्र व महाशिवरात्री। इसमें दीपावली की रात्रि को तंत्रशास्त्र की महारात्रि कहा जाता है।।


