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मेले में बिछड़ने की कहानी तो खूब सुनीं, आज पढ़िए मेले में 20 वर्ष बाद मां के मिलन की अभूतपूर्व घटना

अनुराग दर्शन विशेष (अनुराग शुक्ला)। प्रयागराज माघ मेला संगम स्थित गंगा सेना शिविर में योगगुरु आनंद गिरी महाराज के सानिध्य में एक बिछड़े हुए परिवार का मिलन हुआ । मेले में बिछड़ने की कहानी तो आपने जरूर सुनी होंगी पर हम जो कहानी बताने जा रहे हैं उसे सुन कर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे। इससे एक शिक्षा भी मिलेगी।

यह मिलन एक अद्भुत कहानी का रूप ले लिया । एक कहानी ऐसी भी लगभग 20 वर्ष पूर्व माता पिता के आपसी संबंधों में कटुता के कारणों से माँ ने घर छोड़ दिया। शिक्षा बहुत ज्यादा नहीं थी । बस आत्म स्वाभिमान ने कदम उठाया। और चल पड़ी संघर्षों के रास्ते पर प्रयागराज से जा पहुँची पंजाब । मजदूरी नोकरी और धीरे धीरे धर्म के मार्ग के सहारे आज वर्षो बाद पुनः माँ गंगा की याद ले आई। तो गंगा सेना शिविर में शरण ली और माँ गंगा की गोद में नहाने चल पड़ी । देखो नियति क्या खेल खेलती है। घाट पर मिल गया बेटा, बेटे ने तुरंत माँ को पहचान लिया ।

माँ ने कहा नहीं नहीं में तेरी माँ नहीं हूं । बस कुछ देर की कठोरता के बाद माँ पिघल गई । एक दूसरे को गले लगाया और फिर फोन दौड़ा हर ओर गाँव से बेटी ओर एक बेटा भाग कर आये। रात को11 बजे फोन पहुँच उस बेटे के पास जिसने कसम खाई थी, कि माँ नहीं मिली तो घर नहीं आउंगा। पिछले 14 वर्षों से घर नहीं आया। आज अचानक फोन ने खुश कर दिया । बहन ने कहा भईया जल्दी आओ माँ मिल गई है ।

भाई भाग कर पहचा प्रयागराज सब एक दूसरे के गले लगा कर खुशी के आंसुओं में भीग गए । योग गुरु आनंद गिरी महाराज के पास जब माँ पहुंची, तो पूछा कहा थी आप अभी तक और क्या किया । इतने समय माँ ने अपने भगवान को याद कर रोने लगी । बोली गुरुजी में गई तो थीं मरने पर मेरे जमीर ने मरने नहीं दिया । काम करने लगी अच्छी मजदूरी मिलने लगी तो बेटियाँ के बारे में सोचा अपनी जमीन खरीदी मकान बनाया बेटियां के लिए 10 लाख रुपये की एफडी करवादी।

इतना संघर्ष आज भी लोग करते हैं । आज की पीढ़ी जो निराशावादी हो रही हैं। उनके लिए यह घटना एक आदर्श बननी चाहिए ।

स्वामी आनंद गिरी आज मुझे भगवान का धन्यवाद करना है ।प्रभु कृपा से शिविर इतने वर्षों से लगा रहे हैं पर आज शिवीर लगाना सार्थक हो गया।

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