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परमधर्मसंसद में बोले स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती – गंगा और भारत स्वच्छता की बात बेमानी

प्रयागराज। मुझे गंगा ने बुलाया है कहकर हिन्दुओ की सहानुभूति ली गयी पर अब गंगा की स्वच्छता को छोडकर भारत को स्वच्छ बनाने का काम शुरू कर दिया गया है जो पूरी तरह से बेमानी है ।

उक्त उद्गार परमधर्मसंसद् 1008 के परम धर्माधीश एवं पूज्यपाद अनन्तश्रीविभूषित उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं पश्चिमाम्नाय द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज परमधर्मसंसद् में कही ।

उन्होंने कहा कि देवालय से पहले शौचालय का नारा दिया गया । अब यदि हर घर में शौचालय बनेगा तो उसकी सफाई के लिए अधिक पानी की आवश्यकता होगी और उसका मल जल सरोवर या नदी मे ही जाएगा । और यदि इनमें न भी डाला जाए तो भूमिगत जल में चला जाएगा जहाँ से लोग पीने का पानी निकालते हैं । ऐसे में यह सोचना होगा कि हम भारत स्वच्छता और गंगा स्वच्छता के नाम पर सरकार क्या कर रही है ।

हिन्दुओं के लिए ही नही अपितु सभी के लिए गौमाता उपयोगी

भारत की अधिकांश जनता शाकाहारी है । ऐसे में केवल कुछ लोगों के प्रोटीन की चिन्ता सरकार कर रही है यह ठीक नहीं । जो लोग प्रोटीन के लिए गाय के दूध पर ही निर्भर हैं उनका क्या होगा ? इस पर भी सरकार को विचार करना चाहिए ।

उन्होंने कहा कि जब गाय के शरीर में सभी देवताओं ने प्रवेश कर लिया तब गंगा जी और लक्ष्मी जी को स्थान नहीं मिला । तब ब्रह्मा जी ने कहा कि गाय के गोबर में लक्ष्मी जी और गोमूत्र में गंगा जी निवास करें । यही कारण है कि जब भी सनातनी समाज में कोई शुभ कार्य होता है तो गोबर से धरती को लीपा जाता है ।

शंकराचार्य जी ने कहा कि हमें लगा था कि एक सन्त जब मुख्यमंत्री बना है तो कम से कम गौ हत्या तो बन्द ही होगी पर निराशा ही हुई क्योंकि इनके राज में वैध कतलखाने चलने लगे ।

उन्होंने कहा कि गौ माता केवल हिन्दुओं के लिए ही नही अपितु सभी के लिए अत्यन्त आवश्यक है । अतः इसकी रक्षा की जानी चाहिए । सदन का संचालन स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानन्दः सरस्वती महाराज ने किया। प्रातः 10 बजे से पुनः परमधर्मसंसद् आरम्भ होगी ।

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