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छोटी नदियां बीमार हुई तो न किसान बचेंगे न ही गंगा- राजेंद्र सिंह

कुम्भ नगर। छोटी नदियां बचाओ अभियान और जल बिरादरी के शिविर सेक्टर 6 में 31 जनवरी को छोटी नदियों को बचाने के लिए देश भर के जल कार्यकर्ताओं की बैठक हुई।

तरुण भारत संघ के संस्थापक एवं जलपुरुष के नाम से विख्यात रेमनमेगसेसे विजेता राजेन्द्र सिंह ने इस मौके पर कहा कि जब तक छोटी नदियो की सेहत नहीं ठीक होती, न भारत के समाज स्वस्थ रह सकता है और न गंगा। उन्होंने कहा कि सरकारें नदियों की हत्या करने वाली योजनाएं बनाना बन्द करें।

जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने कहा कि जब तक छोटी नदियां और ताल झील नहीं बचेंगे, पेड़ नहीं बचेंगे, कोई बड़ी नदी नहीं बचेगी। उहोने कहा कि छोटी नदियो के शिविर में पूरे देश से जल बिरादरी के लोग 108 नदियों का जल और मिट्टी लेकर आये हैं। प्रयागराज में लगे कुम्भ मेला में अगर नदियो के साथ न्याय नहीं होगा तो कहा होगा? डॉ राजेन्द्र सिंह ने कहा कि गंगा बचाने के नाम पर केंद्र की सरकार सिर्फ झूठ बोल रही है।

गंगा को बीमारी दिल की है और नरेंद्र मोदी की सरकार गंगा के जबड़ों का इलाज करने में लगी है। यह गंगा के साथ धोखा है। जलपुरुष ने कहा कि समाज को अब सीधे पानी की राजनीति करनी होगी। तभी किसान खुशहाल होंगे और गांवों से पलायन रुकेगा। उहोने कहा कि गंगा के लिए स्वामी आत्मबोधनन्द सरस्वती 100 दिन से अनशन कर रहे हैं मगर सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। अविरल गंगा की जंग में अब समाज को उनके साथ खड़ा होना पड़ेगा वरना उनके प्राण चले जायेंगे। उन्हीने कहा कि वे अनशनरत सन्त को समर्थ देकर आये हैं।


इस मौके पर छोटी नदियों के सम्मेलन को आशीर्वाद देने पहुँचे जगदगुरु षंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानन्द देवतीर्थ ने कहा कि जो राजा अपनी प्रजा की रक्षा न कर सके, उसको गंगा माफ नहीं करतीं। उन्होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछा कि प्रधानमंत्री आपने तो कहा था कि गंगा ने आपको बुलाया है। आप गंगा के साथ न्याय करेंगे? फिर गंगा के साथ धोखा क्यों? स्वामी अधोक्षजनन्द ने कहा कि देश में छोटी नदियो से कब्ज हटाने, नदियों के वन बचाने की लड़ाई छेड़नी होगी। उन्होने कहा कि कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर के राज्यों में छोटी नदियों के साथ अन्याय हो रहा है।

इस आंदोलन को आगे बढ़ाया जाए। राजस्व अभिलेख में नदी को नदी का दर्जा दिया जाए और उसमें सीवर डालना फौरन रोका जाए। नदी की जमीन और उसके जंगल पर कब्जा करने वालों पर अब सन्तों का दंड चलेगा। छोटी नदी बचाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि जल सम्वाद के दौरान नदी के सामने बताये गए खतरों के खिलाफ संगठित संगर्ष छेड़ा जाएगा। अब श्रीनगर से तवी नदी के किनारे से यात्रा शुरू होगी और विदर्भ समेत देश के अन्य हिस्सों में हो रही लड़ाई को संगठित करके किसानों को नदी बचाने के लिए लाठी और फावड़ा लेकर साथ जोड़ेंगे।

उहोंने कहा कि प्रयागराज की ससुर खडेरी, मनसयिता नदी के पुनर्जीवन की शुरुआत की जाएगी और कानपुर की पाण्डु नदी का काम आगे बढ़ेगा। राज्य के सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह से प्रदेश की दूसरी नदियों के सुधार के लिए भी बात होगी। सरकार नहीं मानी तो जवान और किसान सड़क पर आएंगे। इस मौके पर वन विभाग को वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी कुमुद दुबे ने कहा कि नदी के साथ चार स्तर पर वन रोपण करना होगा, तभी नदी के किनारे प्राकृतिक फ़िल्टर तैयार होंगे जो नदी को प्रदूषित होने से बचाएंगे।

उन्होने कहा कि छोटी नदियों के किनारे पौधरोपण शुरू किया जाए। एक एक पेड़ नदी बचाने का ही काम है। लन्दन से खासतोर पर नदी सम्वाद के लिए आये प्रोफेसर एके अग्निहोत्री ने नदी की हालत पर गीत गाकर उसका दर्द बयां किया।
गीत के बोल हैं” अग्नि में समाधि लिए, कब तक कैसे जियूँ।
इतना तू ही बता जीवन के देवता।
तन्वंगी छिछली हूँ,
सूखी हूँ पर बेटी हूँ,
छोटी नदी हूँ मैं,
किन्तु प्राण मां की।
उत्तर प्रदेश बार कैन्सिल के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष अमरेन्द्र नाथ सिंह ने कहा कि नदी के हक में कानून है, अधिवक्ताओ की टीम कोर्ट के अंदर और सड़क पर नदी की लड़ाई में साथ खड़ी होगी।

शकराचार्य को सौंपी गई नदी की गुहार
छोटी नदी बचाओ अभियान की तरफ से एडवोकेट मोनिका आर्या, चित्रकार एके डगलस, आर्य शेखर, कमलेश पटेल अन्ना, रामबाबू तिवारी, प्रभाकर सिंह पटेल, संदीप वर्मा, दिनेश शुक्ला, दिनेश तिवारी, डॉ राघवेंद्र सिंह ने नदी न्याय यात्रा की तस्वीरें, मिट्टी, पानी के नमूने षंकराचार्य को सौंपे। मांग की गई कि छोटी नदियों की जमीन से कब्जाजा हटाया जाए। उसके कैचमेंट एरिया में वनों की कटान रोकी जाए। नदी की जमीन का चिन्हांकन करके जिले की नदियों को पाठ्यक्रम में पढ़ाना शुरू किया जाए। शहरों का सीवर किसी भी हालत में छोटी नदियों में न डाला जाए। नदियों की गणना कराई जाए।

जल सम्वाद के दौरान तय हुआ कि छोटी नदियों की मिट्टी और पानी की कलश यात्रा कल्पवासियों के बीच लगातार ले जाई जाएगी ताकि सभी को नदी के दर्शन हो सकें और लोग एक ताल बचाने, 5 पेड़ लगाने का संकल्प लें। इसी से जिले की नदी बचेगी। इस मौके पर जेपी आंदोलन से जुड़ी पुतुल जी, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रॉफेसर राहुल पटेल, शशिकान्त त्रिपाठी, हाईकोर्ट के सब रजिस्ट्रार हेम बहादुर सिंह, इलाहाबाद विवि के छात्र नेता संदीप वर्मा प्राक्टर, अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव, मनोव्यवहार के एक्सपर्ट डॉ विवेक कटियार, मानवाधिकार एसोशिएसन के पदाधिकारी, पन्त इंस्टिट्यूट और इलाहाबाद विवि के छात्र, शोध छात्र मौजूद रहे।

रात्रि में छोटी नदियों पर चर्चा
सेक्टर 6 के शिविर से जल पुरुष रात्रि में अचानक तुलसी मार्ग स्थित जगदगुरु शंकराचार्य अधोक्षजानन्द के शिविर में पहुचे और जल संरक्षण के लिए उनसे देर तक गहन मन्त्रणा की।
रिवर डेमोक्रेसी के लिए 7 से आएंगे विदेशी चित्रकार
छोटी नदियां बचाओ अभियान और जल बिरादरी के शिविर नदियों के दर्द को उकेरने के लिए इंटरनेशनल आर्टिस्ट रेजीडेंसी लगेगी जिसमें देश- विदेश के चित्रकार, साहित्यकार जुटेंगे। 9 अलग अलग देशों के चित्रकार और उनके नदियों पर बने चित्र आएंगे जो राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे।

युवाओं को जोड़ेंगी पुतुल
छोटी नदियों के अभियान से जेपी मूवमेंट की वरिष्ठ नेता पुतुल ये छोटी नदियों की लड़ाई के लिए युवकों, युवतियों की टीम को जोड़ेंगी। सर्वसेवा संघ के वरिष्ठ नेता रामधीरज भी इस काम में मददगार बनेगे। आज की बैठक में कृतिक पांडे, दिनेश तिवारी, अर्चना कुशवाह, अजित सिंह, रवीना, सबीना परवीन, सुरेश सिंह तोमर, कांग्रेस नेता मनोज सिंह पटेल, अनीता राज, सुदर्शन महराज, सरदार पतविन्दर सिंह समेत उत्तराखंड, बुन्देलखंड, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छतेसगढ़, बिहार, उड़ीसा, दिल्ली, हरियाणा से आये छोटी नदी बचाओ अभियान और जल बिरादरी के कार्यकर्ता शामिल रहे।

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