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मोदी राज में सामाजिक बेरोजगारी विराट रूप में सामने आई- संजय निरूपम

प्रयागराज। हर साल एक करोड़ तीस लाख नए बेरोजगार तैयार होते है और उन अंधी गलियों में खो जाते है जिन्हे रोशन करने का वादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौजवानों से किया था। हर महीने 10 लाख नए बच्चे नौकरी मांगने के लिए सामने आते है। हमारा दुर्भाग्य है कि विश्व का युवा देश आज सर्वाधिक बेरोजगारी का दंश झेल रहा है।

संजय निरूपम ने आंकड़ों के सहारे खोली मोदी की पोल

कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने केंद्र सरकार पर देश को सामाजिक बेरोजगारी के अंतहीन अंधेरे गलियारे में धकलने का आरोप लगाया। उन्होने कहा कि मोदी ने वादे तो बहुत किए लेकिन रिजल्ट जीरो रहा। मुझे पुरा विश्वास है कि योगेश शुक्ला अपने वादों पर खरे उतरेंगे क्योंकि उन्होने बीस से ज्यादा सफल आंदोलन कर इस बात को साबित किया है। स्थानीय व्यक्ति का चुना जाना इस बात का संकेत है कि लोगों में अपनी पहचान अपनी अस्मिता बनाए और बचाए रखने की ललक है।

उड़ाई मुद्रा योजना के दावों की धज्जियां

कांग्रेस नेता ने कहा इस समय देश में 12 करोड़ बेरोजगार है। उन्होने मुद्रा योजना के दावों की धज्जियां उड़ाते हुए बताया कि ग्यारह करोड़ लोन में से नब्बे फीसद लोन शिशु कैटेगरी के तहत दिए गए है यानी मात्र ग्यारह हजार रुपए । क्या इस देश में ग्यारह हजार रुपए में व्यापार शुरु कर पाना संभव है। उन्होने कहा कि नोटबंदी के बाद बरबाद हुई अर्थव्यवस्था का आलम यह है कि छह लाख से ज्यादा टैक्सपेयर की संख्या घटी है। जबकि वित्त मंत्री अरूण जेटली नोटबंदी की सफलता टैक्यपेयर की संख्या बढ़ने के रूप में बता रहे हैं।

उद्योगपतियों को इन्होने देश के बाहर पैसा लेकर भागने दिया


संजय निरूपम ने आरोप लगाया कि किसानों का कर्ज माफ करने में इस सरकार सांप सूंघ जाता है और 36 बड़े उद्योगपतियों को इन्होने देश के बाहर पैसा लेकर भागने दिया है। 9 हजार उद्योगपति ऐसे है जो मोदी सरकार की नीतियों से तंग आकर देश छोड़ चुके हैं।

उन्होने कहा कि बैंकों का एनपीए जो 2014 में 2 लाख करोड़ था वह अब बढ़कर 24 लाख करोड़ हो गया है। निरूपम ने कहा कि योगेश शुक्ला ने पीसीएस छात्रों की लड़ाई लड़ी है और वे संकल्पित है कि इन्हे रोजगार मिले।

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