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भागवत मूलतः भक्ति ग्रंथ है-अनिरुद्ध जी महाराज

प्रयागराज। आज दिनांक 19. 12.19 को दिव्य अध्यात्म राष्ट्र सेवा मिशन प्रयागराज के द्वारा आयोजित दिव्य श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर मुंशी राम प्रसाद की बगिया नारायण वाटिका में भक्तों को कथा का रसपान कराते हुए प्रखर राष्ट्र चिंतक डॉ अनिरुद्ध जी महाराज ने कहा कि भागवत मूलता भक्ति ग्रंथ है अतः ईश्वर के प्रति आस्था और विश्वास इसका प्रदेय भक्त प्रहलाद हो या ध्रुव चाहे दरिद्रता का दंश भोग रहे सुदामा हो, जो जीवन के प्रतिकूल परिस्थितियों में भी ईश्वर से विमुख नहीं हुए इनके जीवन में विषमताए आती हैं समस्याएं इन्हें घेरती हैं परंतु फिर भी वह विचलित नहीं होते भागवत यही जीवन में विश्वास भरना चाहती है ।

यदि मुसीबत में पड़ा हुआ गजेंद्र उसे पुकारता है तो वह उसकी रक्षा करने के लिए दौड़े चले जाते हैं, तो कभी भक्तों के लिए उत्तरा के गर्भ में पल रहे अबोध गर्भ की रक्षा करने व द्रौपदी की लाज बचाने के लिए स्वयं आ जाते हैं । शर्त केवल इतनी सी है आप केवल प्रभु को केवल अंतः करण से उन्हें शुद्ध रूप से उन्हें पुकारे।

आज की कथा में बड़ी धूमधाम से कृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया इस अवसर पर भक्तों ने भगवान श्री कृष्ण जी की नंद गोपाल स्वरूप दर्शन कर आनंद उठाया आज की कथा के मुख्य यजमान विमला जायसवाल रही और संचालन राजेश केसरवानी जी ने किया कथा में आज मुख्य अतिथि के रुप में श्री मुरारी लाल अग्रवाल पूर्व महापौर इलाहाबाद एवं उनके साथ डॉक्टर सुशील सिन्हा जी सिंह जी त्रिपाठी जी दिनेश सिंह एवं जय बाबूजी ने महाआरती की कथा में मुख्य रुप से सर्व श्री कुमार नारायण नीरज गुप्ता राजेश केसरवानी प्रवीण कुमार राहुल सिंह पटेल अजय गुप्ता मधुसूदन निषाद प्रमोद मानस कुसुम केसरवानी साधना चौरसिया केशरवानी आदि सैकड़ों भक्त जनों ने कथा का रसपान किया।

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