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उद्धार ईश्वर करेगा, मनुष्य स्वीकार तो करे – स्वामी आनंद गिरि


प्रयागराज। गंगा सेना शिविर में चल रही श्री रामकथा के चौथे दिन योगाचार्य स्वामी आनंद गिरि ने भगवान शिव द्वारा भवानी को सुनाई जा रही कथा के प्रसंग पर प्रवचन दिए।

उन्होंने कहा कि शिव ने बताया कि वह बिना बताए (पार्वती को) ज्योतिषी बनकर बाल राम के दर्शन करने अयोध्या में दशरथ के दरबार में गए थे। वहां चारों पुत्रों का नामकरण हुआ। पूरे विश्व को विश्राम देने वाले बड़े पुत्र का नाम राम रखा गया।

पूरे विश्व का भरण-पोषण करे उसका नाम भरत रखा गया। जिसके नाम से शत्रुता मिट जाए उसका नाम शत्रुघ्न रखा गया। रामानुज और धरती के धारक का नाम लक्ष्मण रखा गया। गुरु वशिष्ठ ने दशरथ जी से कहा कि यह आपके चारों पुत्र ही नहीं हैं, बल्कि ये चारों वेदों के सूत्र भी हैं।


स्वामी जी ने कहा कि इसके बाद राम के विश्व का मित्र बनने की लीला के तहत गुरु विश्वामित्र दरबार में पहुंचते हैं। वह दशरथ से कहते हैं कि महाराज आप तो गद्दी पर बैठे हो, लेकिन साधु-संत आसुरी उत्पात के कारण यज्ञ, साधना, अनुष्ठान नहीं कर पा रहे हैं। स्वामी जी ने कहा कि राष्ट्र, विश्व कल्याण के लिए साधु-संतों को सत्ता के दरवाजे पर जाना पड़े यह सत्ता के लिए शर्म की बात है। इसके लिए तो सत्ता को चाहिए कि वह साधु-संतों के आश्रमों में जाकर पूछे कि आप लोगों की सत्ता ठीक चल रही है या नहीं।
कुशलक्षेम जानने के बाद विश्वामित्र ने कहा कि वह क्षत्रिय हैं। क्षत्रिय को मांगना शोभा नहीं देता है, लेकिन वह तप करके संत बन चुके हैं। इसलिए विश्व के कल्याण के लिए आपके दो पुत्रों को मांग रहे हैं। स्वामी जी ने कहा कि रघुवंश परंपरा की भाषा में ‘न’ शब्द है ही नहीं। विश्वामित्र की मांग को शिरोधार्य करते हुए दशरथ ने सहर्ष राम, लक्ष्मण को विश्वामित्र को सौंप दिया।
स्वामी जी ने कहा कि विश्वामित्र के साथ राम-लक्ष्मण चल दिए। रास्ते में ताड़का को निर्वाण दिया। तब विश्वामित्र को यकीन हो गया कि यह ब्रह्म हैं। विश्वामित्र के साथ राम गौतम ऋषि के आश्रम पहुंचे और ऋषि के श्राप से पत्थर बन गई अहिल्या का उद्धार किया। स्वामी जी ने कहा कि राम सुधारने की बात नहीं करते, वह स्वीकारते हैं। खुद को सुधारो, दूसरों को स्वीकार करो। उद्धार तो ईश्वर करेगा, मनुष्य स्वीकार तो करे। कथा में देवेंद्र मिश्र, इरा मिश्रा, इंदु मिश्रा, राकेश सुहाने, शरद मिश्रा, तरुण ,सोनाली चोपड़ा सहित शहर के सम्भ्रान्त नागरिक एवं श्रद्धालु गण उपस्थित रहे।

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