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आत्मा परमात्मा मिलन ही महारास है- संत राजेंद्र जी महाराज

प्रयागराज । श्रीमद् भागवत सप्ताह कृष्ण कथा के छठे दिवस में व्यासपीठ पर विराजमान संत राजेंद्र जी महाराज के अमृत वाणी में कथा का वाचन किया जा रहा है।

परम सानिध्य श्री श्री 108 श्री हरि चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज टीकरमाफी जीके काली सड़क रोड स्थित पंडाल में कहीं।

आज के पावन प्रसंग में यज्ञ की महिमा का वर्णन किया गया और गिरिराज जी पावन महिमा का वर्णन 7 वर्ष के कृष्ण ने गिरी श्याम गोवर्धन पर्वत को धारण कर के इंद्र के अभिमान को नष्ट किया। महाराज का वर्णन ने कहा कि कृष्ण योगियों के योगी हैं। वेद की मंत्र है ।

रुकमणी लक्ष्मी स्वरुप है द्वारिकाधीश पति के रूप में आप में विराजमान रहती हैं और उन्हीं से विवाह किया जीवन संकल्प अच्छा होना चाहिए जीवन के कृष्ण पति भी है और परम पति है पंडाल में कथा का कल विश्राम होगा कथा 2:00 बजे से 5:00 बजे तक निरंतर चलती रहती है कथा का मुख्य व्यवस्था हर्ष चेतन ब्रह्मचारी जी आचार्य जयप्रकाश शास्त्री जी इंद्रमणि पांडे कुंवर अग्रवाल एवं समस्त ग्रुप वासी श्रोता मौजूद थे।

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