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क़वारन्टीन किए गए मजदूर घूमते हैं गांव में प्रशासन को नहीं हैं खबर

प्रयागराज (अनुराग शुक्ला ) । जिला के शंकरगढ़ ग्राम हर खोरिया कला बिना क़वारन्टीन किये मजदूरों को घरों में भेजना खतरनाक साबित हो सकता है पूरे विश्व सहित भारत भी कोरोना महामारी से जूझ रहा है ।

कोरोना संकट के बीच मे दूसरे राज्यो, व जिलों से प्रवासी मजदूरों को अपने घरों पर पहुचने का सरकार का सराहनीय कदम है लेकिन जो प्रवासी मजदूर अपने घरों में बिना क़वारन्टीन किये हुए चोरी-छिपे सीधे घरों में पहुँच जा रहे है अगर किसी को भी कोरोना के लक्षण हो तो पूरा परिवार व गाँव का जीवन खतरे में पड़ सकता है ।

अभी तो हर खोरिया कला ग्रामीण क्षेत्र तो सुरक्षित महसूस कर रहा था। लेकिन अगर जो मुंबई जैसे शहर
से आये मजदूरो को बिना क़वारन्टीन किये घरों में भेज दिये जाते है तो वो दिन दूर नही जब ग्रामीणों को भी इस कोरोना महामारी का संकट से जूझना पड़ सकता है अगर जो कोई भी प्रवासी आता है तो उसे घरों पर भेज दिया जाता है और कहा जाता है कि आप घरों में ही 21 दिन होम क़वारन्टीन हो जाये लेकिन क़वारन्टीन तो दूर की बात ज्यादातर लोग इधर उधर गाँवो में घूमते नजर आते रहते है।

अगर प्रशासन को जानकारी भी दी जाए तो जिम्मेदार अधिकारी कोई भी पहुंचकर जांच नहीं करते हैं कि सच्चाई क्या है वही इन लोगों की वजह से गाँवो में ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है अगर कोई भी ग्रामीण इस बात पे आपत्ति जताते है तो प्रवासी मजदूर नाराज हो जाते है तथा अभद्र भाषा का प्रयोग करते है जिससे ग्राम के जिम्मेदार भी इस संदर्भ में कोई ठोस कदम नही उठा रहे है।

अगर इसी प्रकार से प्रशासन की रवैय्या रही तो कोरोना से पूरा गांव संकट में आ सकता है। प्रयागराज के कोरोना योद्धाओ जिला में अधिकारी , पुलिस अधकारी , तथा डॉक्टरों आदि विभागों की अथक मेहनत पर पानी फिर सकता है अतः ग्रामीणों व बाहर से आये मजदूरों को भी जागरूक होना पड़ेगा नही तो कोरोना का संकट अभी टला नही है । औऱ ये लड़ाई हमको सबको काफी दिनों तक लड़ना पड़ेगा।

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