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UP में अपराधों का ग्राफ निरन्तर बढ़ रहा- राजेन्द्र चौधरी

इलाहाबाद। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव राजेन्द्र चौधरी ने रविवार को कहा कि सत्ता सम्हालते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपराधियों को कड़ी चेतावनियां जारी की थी. लेकिन 10 महीनों में प्रदेश में अपराधों का ग्राफ कम नहीं हुआ, उसमें बढ़ोत्तरी होती जा रही है।

हर मोर्चे पर अपनी असफलता छुपाने के लिए उत्तर प्रदेश में इन दिनों पुलिस बल द्वारा मुठभेड़ के नाम पर अपराधियों को मार गिराने की ‘वाहवाही‘ का प्रचार हो रहा है।

पिछले 72 घंटो में 23 मुठभेड़ दिखाई गई. 3 दिन में 13 जिलों में ये मुठभेड़ हुई। राजेंद्र चौधरी ने कहा कि विडम्बना है कि पुलिस की इन मुठभेड़ों से भी अपराध नियंत्रण नहीं हो रहा है।

अपराधी बेखौफ होकर हत्या लूट, डकैती कर रहे हैं. शोहदों द्वारा छेड़छाड़ और बलात्कार के मामलें थम नही रहे हैं. राजेंद्र चौधरी ने कहा कि बीजेपी सरकार के इशारे पर पुलिस अधिकारी अपराध नियंत्रण के नाम पर फर्जी मुठभेड़ों को अंजाम दे रहे हैं।

पिछले दिनों कभी व्यापारी को तो कभी छात्रों को पुलिस ने फर्जी मुठभेड़ दिखाकर मार डाला. कुछ मामलोें में तो पुलिस का असली चेहरा सामने भी आ चुका है. अदालत से पुलिस वाले सजा पा चुके हैं।
राजेंद्र चौधरी ने कहा कि ताजा मामला 3 फरवरी की रात का है, इसमें पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ का नाटक सामने आया है. जानकारी के अनुसार 3 फरवरी की रात करीब 9.30 बजे जनपद नोएडा थाना फेस-3 के सेक्टर 122 से जितेन्द्र यादव अपनी गाड़ी से बहन की लगन चढ़ाकर लौट रहा था. उसके साथ 2 अन्य लड़के भी थे।

इनके पहुंचते ही पास में कहीं से पुलिस इंस्पेक्टर आए और जितेन्द्र से बोले कि कहां गुन्डई करते घूम रहे हो। जितेन्द्र ने अपने बहन की लगन चढ़ाने की बात कहीं, तब पुलिस इंस्पेक्टर ने उसको गाड़ी में ढकेल कर बैठा लिया. कुछ दूर जाने पर उसके माथे पर रिवाल्वर लगा दी लेकिन उसके माथा नीचे कर लेने से गोली गर्दन के पार हो गई. दूसरे युवक सुनील को भी गोली लगी. जितेन्द्र गम्भीर रूप से घायल है।

उसको अस्पताल में भर्ती किया गया है.राजेंद्र चौधरी ने कहा​ कि ऐसा प्रतीत होता है कि इन लड़को को पकड़कर पुलिस मुठभेड़ के नाम पर मार देना चाहती थी. पुलिस का यह अमानवीय और हिंसक चेहरा निहायत निंदनीय है।

इस कांड में शामिल पुलिस वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए. मुख्यमंत्री को मुठभेड़ का सहारा लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों की लगाम कसनी चाहिए. यह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है।

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