योग ध्यान की एक पारंपरिक पद्धति

प्रयागराज । योग प्राचीन भारत के संतो द्वारा विकसित ध्यान की एक पारंपरिक पद्धति है। योग हमारे शरीर को स्वस्थ ही नहीं रखता अपितु हमारे मन को एकाग्र रखने में मदद भी करता है जो कि एक सुखद जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
योग का शाब्दिक अर्थ है जुड़ना अर्थात जुड़ाव ब्रह्मांड से। आध्यात्मिक रूप से देखा जाए तो योग जीवात्मा और परमात्मा का मिलन है तथा व्यवहारिक तौर पर कहा जाए तो योग शरीर , मन और भावनाओं को नियंत्रित रखने का साधन। महर्षि पतंजलि ने अपने योग सूत्र में वर्णन किया है- “यम ,नियम ,आसन ,प्राणायाम प्रत्याहार ,धारण, ध्यान और समाधि” योग के आठ अंग बताए हैं।
हमारी बदलती जीवन शैली में योग का महत्व और भी बढ़ गया है। इसका कारण व्यस्ततम दिनचर्या और मन की व्यग्रता है। निश्चित ही योग करने से आपके मन की व्यग्रता शांत होगी।
प्रातः काल का समय योग करने का सही समय माना गया है क्योंकि इस वक्त व्यक्ति की सभी इंद्रियां भली भांति गतिमान होती है। आइए हम सब संकल्प लें 21 जून 2020 अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर अवश्य योग करेंगे और अपने जीवन को खुशहाल बनाएंगे।
मुझे( सलोनी अग्रवाल) INO( अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा) की ओर से ब्लॉक संयोजक ।


