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राम की भक्ति समस्त सुखों से श्रेष्ठ – स्वामी आनंद गिरि

प्रयागराज। गंगा सेना शिविर में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के दूसरे दिन महंत श्री नरेंद्र गिरी महाराज पीठाधीश्वर मठ बाग़म्बरी गद्दी के कृपा पत्र शिष्य स्वामी श्री आनंद गिरि जी ने व्याख्यान करते हुए कहा कि सुंदरकांड में एक भक्त की भक्ति का चित्रण बहुत ही रोचक ढंग से किया गया है। जो हमें अपने जीवन के अंदर भक्ति को प्राप्त करने की सदप्रेरणा प्रदान करता है।

क्योंकि भक्ति के द्वारा ही भक्त प्रभू के साथ स्वयं को जोड़ सकता है। जैसा कि भक्त शिरोमणि हनुमान जी के जीवन चरित्र में हमें दृष्टिगोचर होता है। उन्होनें अपने राज्य अपने समस्त सुखों का प्रभू श्री राम के लिए त्याग कर दिया और राम की सेवा करते हुए संसार के समक्ष इस बात को रखा कि राम की भक्ति समस्त सुखों से श्रेष्ठ है।

लंका विजय और भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक के बाद हनुमान जी हिमालय पर्वत पर चले गए और वहां श्रीराम की कथा को अपने नाखूनों से उकेरा। जब महर्षि वाल्मीकि अपने द्वारा रचित रामायण दिखाने के लिए हनुमान जी के पास गए तो उन्होंने यहां वर्णित रामायण को देखा। उनका मानना था कि हनुमान जी द्वारा रचित रामायण श्रेष्ठ है। इस पर हनुमान जी ने अपने द्वारा रचित रामायण को मिटा दिया।

स्वामी जी ने आगे कहा कि जब किसी के अंदर संस्कार आ जाते हैं तो उनका मन स्वतः परमात्मा में लग जाता है और वह व्यक्ति श्रद्धा, प्रज्ञा और निष्ठा के साथ प्रभु के भजन में लग जाता है।

कथा में व्यास पीठ की आरती एवं आचार्यगण का विधिवत पूजन स्वाराली फाउंडेशन के निदेशक देवेंद्र मिश्र और इरा मिश्रा सहित शारदा त्रिपाठी एवं ऑस्ट्रेलिया से आई शोभना शर्मा व भोपाल से आये राकेश सुहाने और लख्मी चंद्र बरसैयां ने किया। मंच का संचालन कवि एवं लेखक शरद कुमार मिश्र ने किया। इस अवसर पर विदेश से आये भक्तों सहित विभिन्न प्रदेशों से आये श्रद्धालु एवं जनपद के संभ्रांत नागरिक उपस्थित रहे।

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