संविधान की मूल भावना एवं उसके मूल-भूत सिद्धान्तों पर परिचर्चा
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आज केन्द्र के प्रेक्षागृह में संविधान दिवस के अवसर पर संविधान की मूल भावना एवं उसके मूल-भूत सिद्धान्तों पर परिचर्चा का आयोजन सांय काल किया गया। जिसमें मुख्य अतिथि एवं संचालक डा0 श्लेष गौतम (विधि शिक्षक), श्री विभू कुमार (अधिवक्ता मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद) एवं श्री विपुल कुमार (अधिवक्ता मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद) शामिल हुए। जिसका मुख्य उद्देश्य संविधान की मूल भावना एवं उसके मूल भूत सिद्धान्तों पर परिचर्चा की गयी।
संचालन करते हुए मुख्य अतिथि एवं विधि शिक्षक डा0 श्लेष गौतम ने कहा कि संविधान दिवस किसी राष्ट्रीय पर्व से कम नही है क्योंकि यह हमारे संविधान के पारित होने का दिन है और उस संविधान जिसने की समता, न्याय, बन्धुत्व, अभिव्यक्ति की आजादी एकता अखण्डता तथा गरिमा से जीने का अवसर प्रदान किया गया और अधिकार दिया है। यह संविधान और आजादी हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सतत् अथक संघर्ष का परिणाम है लिहाजा इसका मान सम्मान और इसकी मूल भावना को सदैव अक्षुण रखना हमारा कर्तव्य है। संविधान के मूल भूत ढाचे की अपरिवर्तन शीलता पर भी केशवा नन्द भारती, मिनर्वा मिल आदि वादों के आलोक में बात रखी।
विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधिवक्ता श्री विभू राय ने स्त्रियों के अधिकार एवं उनकी संरक्षा सुरक्षा के संदर्भ में संवाद करते हुए विशाखा वाद के दिशा निर्देशों एवं बाद मे बने कई कानूनों का उदाहरण भी दिया और यह भी कहा कि स्त्री आजादी एवं सशक्तिकरण के बिना संविधान की मूल भावना अधूरी रह जायेगी। स्त्रियों के अधिकार बहुत आवश्यक है तभी यह देश और समाज सशक्त हो सकेगा। साथ ही साथ अनुच्छेद-21 को लेकर भी आपने मूल-भूत अधिकारो के संदर्भ में संविधान के भाग-3 पर बृहद चर्चा की।
अति विशिष्ट अतिथि अधिवक्ता उच्च न्यायालय इलाहाबाद श्री विपुल कुमार ने मूल-भूत अधिकारों, मूल-भूत कर्तव्य एवं नीति निर्देशक तत्वों को लेकर के संवाद करते हुए कहा कि एक संतुलन आवश्यक है इन सभी संदर्भो में। 42वें संविधान संशोधन 1976 से मूल-भूत कर्तव्यों को इसी लिए जोड़ा गया, ताकि मूल-भूत अधिकारों के साथ-साथ हम अपने मूल कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहे और उत्तरदायित्वों निर्वहन कर सके। साथ ही नीति निर्देशक तत्वों को ध्यान में रखकर राज्यों को अपनी नीतियां लोकहित में बनानी चाहिए। प्रस्तुति के अन्त में केन्द्र के मधुकांक मिश्रा द्वारा आमंत्रित वक्ताओं एवं प्रबुद्धजनों का केन्द्र परिवार की ओर से तथा केन्द्र निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर की ओर से धन्यवाद ज्ञापन किया गया।




