कब-कब लेते हैं गंगाजल का सैम्पल कैसे होती है एसटीपी व नालों के शोधन की निगरानी: हाईकोर्ट

गंगा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा प्रदूषण मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन से व्यक्तिगत हलफनामा मांगा है। कोर्ट ने उनसे जानना चाहा है कि क्या दिन डूबने व निकलने के पहले का जल का सैम्पल लिया जाता है तो तीन माह का रिकार्ड पेश करें और बताएं कि एसटीपी व नालों के शोधन की निगरानी कैसे करते हैं। नालों की बायो रेमेडियल व एसटीपी उत्सर्जन की तीन माह की रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि बन कर तैयार एसटीपी नहीं चालू हो पा रहा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति एमके गुप्ता, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा एवं न्यायमूर्ति अजित कुमार की पूर्णपीठ ने गंगा प्रदूषण मामले की सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट को मेला प्रभारी ने बताया कि नरोरा बांध से चार हजार क्यूसेक पानी गंगा मे छोड़ा जा रहा है। कोर्ट ने इसे मेले के दौरान अनवरत छोडऩे का निर्देश दिया है। और मेले में 50 माइक्रोन से कम की पॉलीथिन की बिक्री व प्रयोग पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने एसएसपी से इस कार्य में सहयोग करने को कहा है।
एमिकस क्यूरी अरुण कुमार गुप्ता, डॉ एचएन त्रिपाठी, राजेश त्रिपाठी व मनू घिल्डियाल की कमेटी ने एसटीपी व गंगा के घाटों का निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें कहा गया कि एसटीपी में क्षमता से अधिक गंदा पानी आ रहा है। इससे गैर शोधित गंदा पानी नदी में जा रहा है। यह स्थिति तब है, जब अधिकांश घरों को सीवरेज से नहीं जोडा जा सका है। अधिवक्ता सुनीता शर्मा ने गंगा मे गिर रहे नालों के फोटोग्राफ दाखिल कर रिपोर्ट का समर्थन किया। अधिवक्ता वीसी श्रीवास्तव ने कहा आदेश का ठीक से पालन नहीं हो रहा है। स्वामी हरि चौतन्य ब्रह्मचारी ने भी हलफनामा दाखिल कर बताया कि गंगा किनारे मेले में कचरा डम्प किया जा रहा है।




