स्मरणीय व्रत-संकल्प लेकर कीर्तिमान मनीषी थे पंडित देवीदत्त शुक्ल,शिवनाथ काटजू व पंडित रमादत्त शुक्ल

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। “उद्यमी-साहसी और जीवन को सार्थक बनाने के उद्देश्य को पाथेय के रूप में लेकर चलनेवाले लोग ही सदैव कीर्तिजीवी रहते हैं । पिता-पुत्र एवं गुरु-शिष्य के रूप में ऐसा ही स्मरणीय व्रत-संकल्प लेकर कीर्तिमान मनीषी थे पंडित देवीदत्त शुक्ल, श्री शिवनाथ काटजू एवं पंडित रमादत्त शुक्ल । त्रिवेणी के तट से लगभग आठ दशक पूर्व इस त्रिमूर्ति ने अखिल भारतीय शाक्त-सम्मेलन संस्था के गठन-चण्डी पत्रिका के प्रकाशन-अक्षयवट के अन्वेषण एवं उद्धार का संकल्प लेकर यशस्वी कार्य किया था ।”
उक्त विचार रहे सुधी वक्ताओं के, जो आज चण्डी-कार्यालय, अलोपीबाग में अखिल भारतीय शाक्त-सम्मेलन संस्था के तत्त्वावधान में आयोजित विचार-गोष्ठी में सम्मिलित हुए ।
गोष्ठी का प्रारम्भ श्री गुरु-स्तवन एवं स्तुति-पारायण के साथ हुआ । तदुपरान्त देव-गुरु-मण्डल तथा अखिल भारतीय शाक्त-सम्मेलन संस्था की प्रयागराज के 1942 के कुम्भ-महापर्व के अवसर पर गठन करनेवाले पं0 देवीदत्त शुक्ल जी, श्री शिवनाथ काटजू जी एवं पं0 रमादत्त शुक्ल जी के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया ।
गोष्ठी में अखिल भारतीय शाक्त-सम्मेलन संस्था के माघ मेला-शिविर का सफलतापूर्वक संचालन करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले आचार्य महेन्द्र मिश्र, आचार्य पुरुषोत्तम झा तथा पटना के श्री अरुण पाण्डेय एवं नोएडा के वैद्य ओमपाल सिंह का सारस्वत सम्मान किया गया ।
नगर निगम कार्यकारिणी सदस्य श्री जगमोहन गुप्त ने हिन्दू धर्म और संस्कृति के संरक्षण में संस्थाओं तथा महापुरुषों का भावपूर्ण स्मरण किया । श्री गुप्त ने शुक्ल जी और काटजू के बड़े योगदान पर प्रकाश डाला ।
पंडित देवीदत्त शुक्ल-पंडित रमादत्त शुक्ल शोध संस्थान के सचिव व्रतशील शर्मा ने 1942 के प्रयाग-कुम्भ पर अखिल भारतीय शाक्त-सम्मेलन संस्था की स्थापना तथा उसकी मुख पत्रिका चण्डी के प्रकाशन एवं पत्रिका के द्वारा अपने प्रकाशन के साथ ही हिन्दुओं आराध्य अक्षयवट के उद्धार के बौद्धिक अभियान पर प्रकाश डालते हुए पं0 देवीदत्त शुक्ल, श्री शिवनाथ काटजू एवं पं0 रमादत्त शुक्ल के समर्पित योगदान को रेखांकित किया ।
आचार्य महेन्द्र मिश्र एवं आचार्य पुरुषोत्तम झा ने संस्था एवं पत्रिका के द्वारा तन्त्र-साधना के क्षेत्र में किए गए अविस्मरणीय कार्य पर विचार व्यक्त किए ।
वैद्य ओमपाल सिंह ने चण्डी पत्रिका को साधना एवं साधकों का प्रेरणाप्रद संस्थान बताया ।
पटना के अरुण पाण्डेय ने संस्मरणों के माध्यम से इन महापुरुषों का स्मरण किया ।
गोष्ठी का समापन अखिल भारतीय शाक्त-सम्मेलन संस्था से जुड़े रहे साधक ज्योतिर्विद आचार्य कुमार विमलेन्दु जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिनका कुछ समय पूर्व पटना में गोलोकवास हो गया था ।
देवी-स्तुति के पारायण के साथ गोष्ठी का समापन हुआ ।
इस अवसर पर त्रिभुवन पाण्डेय, अनिलकुमार कनौजिया, विधुभूषणराम तिवारी, देवाशीष उपाध्याय, प्रवेश तिवारी, दीपक कुमार मिश्र, राहुल कुमार, धीरेन्द्र सिंह, अनिलकुमार सहित अन्य श्रद्धालु उपस्थित रहे ।




