आँखों मे अश्क लबों पर सदा ए हुसैन-सियाह लिबास-उदास चेहरे

सड़को पर किसी भी इमामबाड़े से नहीं निकले दसवीं मोहर्रम के जुलूस
दसवीं मोहर्रम का तुरबत व दुलदुल का जुलूस नहीं निकाला गया
करबला में दफ्न हुए ताज़ीये और अक़ीदत के फूल
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज माहे मोहर्रम की दसवीं पर इमामबाड़ा नाज़िर हुसैन बख्शी बाज़ार से निकाला जाने वाला तुरबत का जुलूस इस वर्ष भी कोरोना गाईड लाईन पर अमल करते हुए सड़को पर नहीं निकाला गया।इमामबाड़े के अन्दर ही शहादत का बयान हुआ।मौलाना आमिरुर रिज़वी ने ग़मगीन शहादते इमाम हुसैन व अन्य ७१ शहीदों का ज़िक्र किया।सभी काले लिबास पहने और आँखों मे अश्क भर कर इमाम ए मज़लूम पर गिरया करते रहे।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वान शादाब ज़मन,अस्करी,अब्बास,शबीह अब्बास आदि ने *करबला मे सोने वालो माहापारों अलवेदा* की सदा बुलन्द की। इमामबाड़े मे तुरबत को गश्त कराकर कर वहीं पर लोगों को ज़ियारत कराई गई।वहीं रानीमण्डी स्थित इमामबाड़ा नक़ी बेग से स्व युसूफ हुसैन द्वारा १९४७ में क़ायम किया गया दुलदुल का जुलूस भी नहीं निकला।इमामबाड़े मे ज़ाकिर ए अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने करबला के बहत्तर शहीदों की हक़ और इन्सानियत को बचाने के लिए दी गई क़ुरबानी का ज़िक्र किया।अन्जुमन हैदरिया रानीमण्डी के नौहाख्वान हसन रिज़वी,सज्जाद अली ने नौहा पढ़ा।इमामबाड़े के अन्दर ही दुलदुल की ज़ियारत कराई गई।दुलदुल जुलूस के आयोजक बशीर हुसैन ने लोगों सरकारी गाईड लाईन के अनुपालन मे लोगों को ज़ियारत कराई।दिन भर लोग इमामबाड़े मे ज़ियारत को पहुँचते रहे।चक स्थित जामा मस्जिद,बख्शी बाज़ार स्थित क़ाज़ी जी की मस्जिद मे आशूरे का विशेष आमाल ओलमाओं द्वारा कराया गया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी के मुताबिक़ रानीमण्डी,बख्शी बाज़ार,दायरा शाह अजमल,रौशनबाग़,चक ज़ीरो रोड घंटाघर सब्ज़ीमण्डी बरनतला,बैदन टोला,करैली सहित अन्य मोहल्लों के इमामबाड़ो मे रखे गए ताज़िये के साथ अलम ताबूत ज़ुलजनाह,ज़री,तुरबत,व झूले पर चढ़ाए गए फूलों को दो और चार की संख्या मे करबला क़ब्रिस्तान ले जाकर नम आँखों से सुपुर्देखाक कर दिया गया।वहीं दरियाबाद के इमामबाड़ा,सलवात अली खाँ,इमामबाड़ख अरब अली खाँ,इमामबाड़ा मोजिज़नूमा सहित सैकड़ो घरों मे सजे अलम ताबूत व झूले के फूलो व ताज़िये को दरियाबाद क़ब्रिस्तान मे इमाम हुसैन के रौज़े के पास बनाए गए गंजे शहीदाँ मे सुपुर्द ए लहद किया गया ।
*मस्जिद क़ाज़ी साहब व चक जुमा मस्जिद की छतों पर हुआ आमाले आशूरा*
आसमान के नीचे पढ़ी जाने वाली नमाज़ व आशूरे के आमाल को लेकर जब चकिया करबला मे सामुहिकता वाले आयोजन पर कोविड गाईड लाईन का हवाला देते हुए शासन व प्रशासन की तरफ से पाबन्दी लगा दी गई तो शिया समुदाय के लोगों ने मस्जिदों की छतों पर पढ़ा आमाले आशूरा।
*सात प्रकार के अनाज व शरबत पर नज़्रो नियाज़ के बाद शाम को तोड़ा दिन भर का फाक़ा*
करबला की सरज़मी पर नवासा ए रसूल को तीन दिन का भूखा प्यासा शहीद करने की १४०० साल पहले की घटना को याद करते हुए माहे मोहर्रम की दसवीं (आशूरा) को सभी फूल व ताज़िया दफ्न करने और दिन भर भूक और प्यास से अपने आप को रोक कर फाक़ा रखने के बाद शिया समुदाय ने नमाज़ ए अस्र के बाद सात प्रकार के भुने अनाज से बना सतनजा,शरबत,खिचड़ी,चौराई का साग,जौ की रोटी,काली मसूर की दाल व चावल पर शोहदा ए करबला व असीराने करबला की नज्र दिलवा कर फाका शिकनी की।




