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विद्यालयों में श्रीरामचरित मानस और श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षा अनिवार्य की जानी चाहिए- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द

वाराणसी (अनुराग दर्शन समाचार )। आज आन्ध्र प्रदेश के भाग्यनगर निवासी सनातनधर्मी श्रीराम भक्तों द्वारा काशी के मारवाड़ी सेवा संघ अस्सी में आयोजित रामायण पारायण कथा में पधारे श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज का आयोजकों एवम् यजमानों ने वैदिक विधि-विधान से पूजन किया । इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य भगवान ने अपना आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि ब्यक्ति के जीवन की समस्त समस्याओं का समाधान गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज के श्रीराम चरित मानस में उपलब्ध है। पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने कहा कि श्रीराम श्रीरामचरित मानस के बालकाण्ड का आदि, अयोध्या काण्ड का मध्य और उत्तरकाण्ड के अन्त को जो जान लेता है, वही सन्त है । लेकिन दुर्भाग्य से आज बच्चों को श्रीरामचरित मानस श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षा नहीं दी जाती। जिससे वर्तमान पीढ़ी अपने जीवन के मूल उद्देश्य से भटककर मैकाले शिक्षा पद्धति के कारण पथभ्रष्ट हो रही है | सनातन धर्म ग्रंथों की शिक्षा प्रतिबंधित होने के कारण ही देश में पापाचार् अनाचार, दुराचार और भ्रष्टाचार बढ़ा, और उत्तरोत्तर बढ़ रहा है | इसलिए देश के सभी स्तर के सभी विद्यालयों में श्रीरामचरित मानस और श्रीमद्भगवद्गीता की शिक्षा अनिवार्य की जानी चाहिए |

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