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1 किलोमीटर दूरी से पानी लाकर बुझाते हैं हलक की प्यास

पेयजल की आपूर्ति के लिए गाव में बनाई गई टंकी बनी शोपीस

( अनुराग शुक्ला/ रमेश तिवारी ) । कोरांव,प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) स्थानीय तहसील क्षेत्र के कई गांव में वर्तमान समय में भी पेयजल की समस्या लोगों के लिए भारी परेशानी का सबब बनी हुई है। कुछ गांव ऐसे हैं जहां आज भी कई बस्तियों में पेयजल की उचित व्यवस्था ना होने की वजह से लोग साइकिल से कई किलोमीटर की दूरी तय करके पानी लाकर अपनी प्यास बुझाते हैं ।गांव में पेयजल आपूर्ति के लिए लाखों रुपए की लागत से बनाई गई टंकियां पूरी तरह से बदहाल स्थिति में है। कहीं पाइप लाइन का अभाव तो कहीं पर पेयजल की आपूर्ति जिम्मेदारों की मनमानी के चलते शुरू ही नहीं हो पाई है जिसकी बदौलत सरकार द्वारा पानी की उचित व्यवस्था के लिए खर्च की गई करोड़ों रुपए की धनराशि पूरी तरह से बिना काम के दिख रही है ।क्षेत्र के चांद खभरिया गांव पंचायत की आदिवासी बस्ती में पेयजल के लिए कोई सुविधा उपलब्ध न होने की वजह से वहां के लोग पहाड़ी के किनारे स्थित एक कुएं से 1 किलोमीटर की दूरी तय करके पानी लाकर अपने हलक की प्यास बुझाते हैं जबकि ग्राम पंचायत में पेयजल आपूर्ति के लिए बनाई गई करोड़ों रुपए की लागत से पानी की टंकी आपूर्ति न होने की वजह से पूरी तरह से बेकार पड़ी है ।मामले में ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान नारायण पांडे सहित तमाम अन्य ग्रामीणों ने कई बार इस मामले की शिकायत उच्चाधिकारियों से की लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदारों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। आरोप है कि पेयजल आपूर्ति का काम कराने वाला ठेकेदार गांव के ही एक व्यक्ति को पानी की टंकी की सप्लाई की पूरी जिम्मेदारी देकर गायब हो गया है और उक्त व्यक्ति द्वारा केवल टंकी से अपने खेतों की सिंचाई की जाती है और गांव में पेयजल की आपूर्ति नहीं की जा रही है। उक्त मामले को लेकर ग्राम प्रधान सहित अन्य लोगों ने कई बार शिकायत भी की लेकिन परिणाम शून्य ही निकला ।यह तो मात्र एक बानगी है इसके अलावा विधानसभा क्षेत्र के कई ऐसे गांव हैं जहां पर पेयजल आपूर्ति के लिए पानी की टंकी तो करोड़ों की लागत खर्च करके बनाई गई लेकिन उसका सही उपयोग पानी की आपूर्ति न होने की वजह से नहीं हो पा रहा है और लोग पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं।

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