दिल्ली-वाराणसी एचएसआर कॉरिडोर का हाईटेक सर्वे
हेलीकाप्टर व लेजर सक्षम उपकरणों का होगा इस्तेमाल
रेलवे अपनाएगा एरियल लिडार सर्वेक्षण की उन्नत तकनीक
( विनय मिश्रा )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉपरेशन लिमिटेड प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी एचएसआर कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने हेतु हेलीकाप्टर पर लगाये गए लेजर सक्षम उपकरणों का उपयोग करते हुए लाइट डिटेक्शन एण्ड रेंजिंग सर्वे (लिडार) तकनीक को अपनाएगा। मार्ग का जमीनी सर्वेक्षण होने से आसपास के क्षेत्रों की सटीक जानकारी मिल जाती है।
एनएचएसआरसीएल को रेल मंत्रालय द्वारा दिल्ली-वाराणसी एचएसआर कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा गया है। गलियारे की लंबाई 800 किमी है।
प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी एचएसआर मार्ग पर घनी आबादी वाले शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों, राजमार्ग, सड़क, घाट, नदियां, हरे-भरे खेत आदि हैं, जिससे यहां सर्वेक्षण करना अधिक चुनौतीपूर्ण है।
डीवीएचएसआर कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करने की समय-सीमा काफी कम है, इसलिए एरियल लिडार तकनीक का उपयोग करके जमीनी सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। हेलीकॉप्टर पर लगे उपकरणों से डेटा एकत्र करने का काम चरणबद्ध तरीके से 13 दिसंबर से शुरू होगा। रक्षा मंत्रालय से हेलीकॉप्टर उड़ाने की अनुमति मिल गई है और विमान व उपकरणों का निरीक्षण किया जा रहा है।
देश में किसी भी रेलवे परियोजना हेतु एरियल लिडार सर्वेक्षण तकनीक का पहली बार इस्तेमाल मुम्बई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में किया गया था। एरियल लिडार से सर्वेक्षण करने में केवल 12 सप्ताह लगे, जबकि अगर यह सर्वेक्षण पारंपरिक तरीकों से किया जाता तो इसमें 10-12 महीनों का समय लगता।



