जब तब माया का संग बना हुआ है, तब तक कर्मों का त्याग हो ही नहीं सकता- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द

उल्हासनगर (अनुराग दर्शन समाचार )। आज सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु प्रतिनिधि मण्डल के साथ महाराष्ट्र के प्रवास पर पहुँचे श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने उल्हासनगर में राजेन्द्र शांताराम चौधरी द्वारा आयोजित धर्म सभा में उपस्थित सनातन धर्मावलम्बियों को अपना आशीर्वचन एवम् मार्गदर्शन प्रदान किया।महराज जी ने कहा
“जब तक गुणों की जननी माया का आधार बना हुआ है, तब तक ब्यक्ति अपने अज्ञान के कारण जो काम करता है, वे सब आपसे आप गुणों पर अवलम्बित रहते हैं । फिर ब्यक्ति को यह देखना चाहिए कि उसके जो विहित कर्म हैं, उन्हें वह अपने मन के किसी आवेश के कारण छोड़ भी दे तो भी क्या इन्द्रियों के स्वाभाविक धर्म मर जाते हैं ? क्या कान सुनने का काम छोड़ देते हैं ? या क्या आँखों का तेज नष्ट हो जाता है ? या क्या नाक बन्द हो जाते हैं और वे सूँघना छोड़ देते हैं ? क्या भूँख प्यास आदि इछाओं का अन्त हो जाता है ? अथवा जागृति और स्वप्न की अवस्थायें नष्ट हो जाती हैं ? या पैर चलना भूल जाते हैं ? क्या जन्म और मृत्यु भी कभी टल सकती है ? यदि इनमेंं से एक भी बात नहीं हो सकती, तो फिर कर्मों को छोड़ देने से ही क्या होगा ? इसका अभिप्राय यह है कि जब तक माया का आधार बना हुआ है, तब तक कर्मों का त्याग हो ही नहीं सकता | माया के स्वभाव बल से ही सब कर्म अपने आप होते रहते हैं | जब हम रथ पर बैठते हैं; तब चाहे हम कितने ही निश्चल होकर क्यों न बैठें, फिर भी परतन्त्रता के कारण हम हिलते डुलते रहते ही हैं | ब्यक्ति को यह बात भली प्रकार समझ लेना चाहिए कि जब तब माया का संग बना हुआ है, तब तक कर्मों का त्याग हो ही नहीं सकता।
पूज्य शंकराचार्य भगवान ने कहा कि बड़े भाग्य से मानव शरीर मिलता है, अस्तु कर्म योनि में यदि ब्यक्ति को जन्म मिला है, तो सावधान रहकर धर्म द्वारा निर्दिष्ट मार्ग पर चलते हुए विहित कर्मों को पूरे मनोयोग से करते रहना चाहिए | धर्म मंच पर महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास मंत्री, सार्व. बांधकाम मंत्री एवम् ठाणे व गड़चिरौली के पालक मंत्री एकनाथ शिंदे ने पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान का आशिर्वाद प्राप्त किया | इस धर्म मंच पर स्वामी अखण्डानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी केदारानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी बृजभूषणानन्द जी महाराज,श्री कमलेश शास्त्री जी, स्वामी अरुणानन्द जी महाराज, स्वामी ओमानन्द जी महाराज व सम्पूर्ण कार्यक्रम के सूत्रधार नामदेव जी महाराज सहित अन्य सन्त महापुरुष धर्माचार्य विराजमान थे ।



