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गृहस्थी का त्याग करके धर्म के लिए जीवन समर्पित करने वाले व्यक्ति संत कहलाते हैं- स्वामी महेशाश्रम जी महाराज

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। सनातन ज्ञान पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने कहा व्यासपीठ पर आसीन होकर दूसरे धर्म का गुणगान करना अक्षम्य अपराध है। यह सनातन धर्म का अपमान है। ऐसे कृत्य से हिंदू धर्मावलंबियों की भावनाएं आहत होती हैं। जो कथावाचक ऐसा करे उसका सामूहिक बहिष्कार होना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि इधर कथावाचकों का आचरण धर्म व हिंदू मान्यता के खिलाफ रहा है। यह साबित करता है कि वह व्यासपीठ पर आसीन होकर किसी दूसरे के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। सरकार को ऐसे कथावाचकों के संपर्कों व कार्यों की जांच करनी चाहिए। जांच होने पर कई चौंकाने वाले रहस्य लोगों के सामने आएंगे।
स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि सनातन धर्म विरोधी ताकतों में हिंदुओं से सीधे मोर्चा लेने का माद्दा नहीं है। वह हिंदुओं को बांटने व भ्रमित करने के लिए तरह-तरह का कुचक्र रचती रहती हैं। कहीं, कथावाचक भी उनके साथ मिलकर देश व सनातन धर्म विरोधी कार्यों में लिप्त तो नहीं हैं, उसकी पड़ताल करना जरूरी है। कहा कि कथावाचक कहने को सनातन धर्म का प्रचार करते हैं, लेकिन उनकी वास्तविकता कुछ और होती है। ऐसे कई चेहरे इधर बेनकाब होने लगे हैं। उन्होंने कथावाचकों को संत व महात्मा कहने पर आपत्ति व्यक्त की। बोले, संत वह होता है, जो धर्म के लिए सर्वस्व न्योछावर कर दे। घर-गृहस्थी का त्याग करके धर्म के लिए जीवन समर्पित करने वाले व्यक्ति संत कहलाते हैं।

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