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जय महाकाल से गुंजायमान हुआ कुंभ क्षेत्र, किन्नर अखाड़े का शाही स्नान देखने उमड़ी भीड़

कुंभ में इस बार किन्‍नर अखाड़े को पहली बार शामिल किया गया है। सोमवार को मौनी अमावस्‍या के दिन दूसरे शाही स्‍नान पर किन्‍नर अखाड़े के संतों ने भी बढ़चढ़कर शाही स्‍नान में हिस्‍सा लिया। किन्नर अखाड़े के साधु संतों का शाही स्नान आम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। जूना और पंच अग्नि अखाड़े के पीछे आए किन्नर अखाड़े के संत जब संगम नोज पहुंचे तो जय महाकाल के नारे दोनों ओर से लगने लगे। आइए जानते हैं किन्‍नर अखाड़े के शाही स्‍नान की खास बातें…

किन्नर अखाड़े के साधु संतों का शाही स्नान आम श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा। जूना और पंच अग्नि अखाड़े के पीछे आए किन्नर अखाड़े के साधु संत जब संगम नोज पहुंचे तो जय महाकाल के नारे दोनों ओर से लगाए गए। किन्नर अखाड़े के आराध्य महाकाल और वर्चुआ देवी की सवारी थी। अखाड़ा प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अपने रथ पर सवार रहे।

जैसे ही अखाड़े के संत दिखाई दिए श्रद्धालु सुरक्षा घेरा तोड़कर अंदर घुस गए। संतों को घेरा और बलइयां उतरवाई। अखाड़े के संतों ने भी किसी को निराश नहीं किया। सभी का अभिवादन स्वीकार किया। लोगों ने अपनी जेब से नोट और सिक्का दिया। संतों ने अपने दांत से नोट को दबाकर लोगों को वापस किया। मान्यता है कि यह सिक्का बरकत देता है। अखाड़े के शाही स्नान में 30 से अधिक ट्रैक्टर शामिल रहे।

अराध्‍य देवताओं को कराया स्‍नान

किन्‍नर अखाडे़ के प्रमुख महामंडलेश्‍वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अपने रथ पर सवार थे। वह किन्‍नर अखाड़े के आराध्य महाकाल और बहुचरा देवी की मूर्तियों के साथ शाही स्‍नान करने पहुंचे। अपने देवताओं को स्‍नान कराने के पश्‍चात किन्‍नर अखाड़े के संतों ने खुद स्‍नान किया।

स्‍नान के बाद पूजापाठ

स्‍नान के पश्‍चात किन्‍नर अखाड़े के संतों ने मौनी अमावस्‍या के अवसर पर अपनी अघोर साधना भी की।

आम लोगों के बीच आ‍कर्षण

किन्‍नर अखाड़े का शाही स्‍नान आम श्रद्धालुओं के बीच प्रमुख आकर्षण का केंद्र रहा। संतों की लीलाएं आम श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींचती रहीं।

महादेव का डमरू

डमरू बजाकर अपने आराध्‍य देवता महाकाल को प्रसन्‍न करते हुए किन्‍नर अखाड़े के सदस्‍य।

आस्‍था की गर्मी

मौनी अमावस्‍या पर आस्‍था की गर्मी के आगे श्रद्धालुओं के लिए ठंड बेअसर साबित हुई। लोगों ने शाही स्‍नान पर संगम में डुबकी लगाकर पुण्‍य की प्राप्ति की।

शिवजी की आराधना

संगम के तट पर बने किन्‍नर अखाड़े के शिविर में भगवान शिव के महाकाल स्‍वरूप की पूजा करते हुए अखाड़े के संतों ने पूरे माहौल को शिवमय बना दिया।

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