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लोकायुक्त संगठन उत्तर प्रदेश आम जनमानस में प्रचार-प्रसार हेतु आयोजित हुई गोष्ठी
इलाहाबाद। लोकायुक्त के सचिव आर0एन0 पाण्डेय द्वारा सरकिट हाउस में बैठक ली गयी। जिसमें ए0डी0एम0 प्रशासन श्री एम0के0 राय के अलावा जनपद के सभी अधिकारी एवं जन प्रतिनिधि उपस्थित थे। बैठक में मा0 लोकायुक्त सचिव श्री आर0एन0 पाण्डेय ने प्रदेश को भ्रष्टाचार/कुप्राशन मुक्त बनाने हेतु जनता से अपील की तथा अधिकारिता के बारें में स्पष्ट निर्देश भी दिया।
प्रदेश को भ्रष्टाचार एवं कुप्रशासन मुक्त बनाने हेतु जनता से की गई अपील
उत्तर प्रदेश के समस्त विभाग, सरकारी कम्पनियाँ, सहा0 सरकारी कम्पनियाँ, निगम, सोसायटी, परिषदे (जो अधिसूचित हो गयी है), सम्बन्धित परिवादों (अभिकथन/शिकायत) के मामले तथा सेवानिवृत्त देयकों के भुगतान से सम्बन्धित मामले सामने आये।
उत्तर प्रदेश शासन के समस्त विभाग, सरकारी कम्पनियाँ, सहायक सरकारी कम्पनियाँ, निगम, सोसाइटीज व परिषदें (जो अधिसूचित की गई हों) से संबंधित परिवादों (अभिकथन/शिकायत) के मामलें तथा सेवानिवृत्त देयकों के भुगतान, मृतक आश्रित सेवायोजन, विकास प्राधिकरण एवं आवास विकास परिषद, निराश्रित एवं वृद्ध महिलाओं के पेंशन, अनुसूचित जाति व जनजातियों के आरक्षण (सेवा) संबंधी मामलें इस परिधि में आते है।
उत्तर प्रदेश राज्य के समस्त अधिकारीगण (धारा-22 में वर्णित न्यायाधीश/न्यायिक अधिकारी, महालेखाकार आदि को छोड़कर) एवं कर्मचारियों के साथ-साथ मंत्रीगण (मुख्यमंत्री को छोड़कर), विधायक, विधान परिषद सदस्य, महापौर महापालिका, अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद, नगर पंचायतों तथा अध्यक्ष, जिला पंचायत (ग्राम प्रधान को छोड़कर) भी सम्मिलत हैं। इनके विरूद्ध परिवाद (अभिकथन/शिकायत)तथा शासकीय लोक सेवकों के सेवानिवृत्त/सेवाकाल में मृत्यु से संबंधित देयकों के प्रकरण से संबंधित परिवाद जो कि शिकायत की श्रेणी में आते है, लोकायुक्त को प्रस्तुत किये जो सकते हैं।
प्रदेश के लोक आयुक्त तथा उप लोक आयुक्त को अभिकथन तथा शिकायत सम्बन्धी परिवाद निर्धारित प्रपत्र पर तीन प्रतियों में (यथासम्भव राजभाषा हिन्दी में) टंकित कराकर धारा-9(2) के अनुसार नोटरी शपथ पत्र एवं धारा-9(3) के अनुसार परिवाद, शपथ पत्र, संलग्नक/अनुलग्नक का सत्यापन परिवादी स्वंय के द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार करके एवं अभिकथन रूपी परिवादों में रू0 2,000/- प्रतिभूति निर्धारित लेखा शीर्षक “8443 सिविल निक्षेप-00-103-प्रतिभूति निक्षेप-00-00” के अन्तर्गत भारतीय स्टेट बैंक अथवा कोषागार में चालान के माध्यम से जमा करके मूलप्रति सहित प्रस्तुत किया जा सकता है।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाता है कि यदि प्राप्त परिवाद मिथ्या/फर्जी पाया जाता हैं तो ऐसे परिवादों पर माननीय लोक आयुक्त द्वारा रू0 50,000/- तक की धनराशि का हर्जाना लगाया जा सकता हैं एवं प्रतिभूति की धनराशि जब्त की जा सकती है।राज्य सरकार द्वारा ई-पेमेंट से भुगतान किये जाने के कारण, परिवादी अपना राष्ट्रीयकृत बैंक का बचत खाता संख्या, बैंक व शाखा का नाम, जिला एवं आई0एफ0एस0सी0 कोड के साथ-साथ पासबुक की स्वप्रमाणित छायाप्रति, परिवाद दाखिल करते समय प्रतिभूति की धनराशि के मूल चालान के साथ उपलब्ध करायेंगे तभी उनको प्रतिभूति की धनराशि वापस किया जाना संभव होगा। परिवादी को अपना पूरा नाम, पता, मोबाइल नम्बर/ई-मेल के साथ अंकित करना चाहिए।




