गुप्त नवरात्र में पूजन से दूर होते हैं सभी कष्ट: स्वामी विमलदेव

मठ मछली बंदर शिविर में पूजी गयीं 109 नन्ही कन्याएँ
गुप्त नवरात्रि पर स्वामी विमलदेव आश्रम ने किया पूजन, कराया भोजन, किया सम्मानित
( अनुराग शुक्ला/आनंत पांडे )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। माघमेला के सेक्टर चार में गंगोली शिवाला मार्ग स्थित मठ मछली बंदर के शिविर में रविवार को गुप्त नवरात्रि के अंतिम दिवस पर कन्या पूजन किया गया। इस दौरान नन्ही कन्याओं का पांव पखारकर और माथे पर तिलक लगाकर और आरती उतारकर उनकी पूजा की गई। मठ मछली बंदर के महंत और अखिल भारतीय दंडी सन्यासी प्रबंधन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनंत श्री विभूषित दंडी स्वामी श्री विमलदेव आश्रम जी महाराज ने स्वयं 51 कन्याओं का खोडषोपचार पूजन कर उन्हें भोजन कराया। साथ ही आरती कर और उन्हें वस्त्र देकर सम्मानित भी किया। स्वामी विमलदेव आश्रम जी महाराज ने बताया कि शास्त्रों के आधार पर चार नवरात्र बताए गए हैं। दो नवरात्र बड़े स्तर पर मनाए जाते हैं। जबकि दो गुप्त रूप से साधु संतों द्वारा मनाए जाते हैं। गुप्त नवरात्रि पर साधक सन्यासी सिद्धि प्राप्त करने वाले तांत्रिक देवी मां की उपासना करते हैं। जबकि गृहस्थ जीवन वाले साधना पूजन करते हैं। गुप्त नवरात्र में मां दुर्गा की दस महाविघाओं की साधना होती है। गुप्त नवरात्र में की जाने वाली पूजा से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। माघ महीने की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से ही गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होती है। गुप्त नवरात्र का उत्सव साधना और व्रत के लिए होता है। इस मौके पर समिष्टि भंडारे का भी आयोजन किया गया। इस मौके पर महेंद्र स्वरूप ब्रम्हचारी, योगेंद्र स्वरूप ब्रम्हचारी, विनोद पांडेय, मधुसूदन द्विवेदी, उदय शास्त्री, आनंद द्विवेदी, रामेश्वर शास्त्री, सुदर्शन आश्रम आदि रहे।



