इलाहाबाद विवि पर धब्बा है दीक्षान्त समारोह-अवनीश मिश्र
इलाहाबाद। विश्वविद्यालय में 22 वर्षों बाद हुए दीक्षान्त समारोह में आम छात्रों को प्रवेश न दिए जाने से छात्रों में काफी आक्रोश व्याप्त है।

छात्रों ने इसका विरोध भी करना चाहा किंतु प्रशासन ने उन्हें खदेड़ दिया।इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता अवनीश मिश्र शौर्य ने कहा कि यह दीक्षान्त समारोह विश्वविद्यालय के स्वर्ण इतिहास और एक धब्बा है। कुलपति न आजतक कभी आम छात्रों से संवाद स्थापित नहीं किया। उन्होंने इलाहाबाद को एक तानाशाही रवैये के तहत सिर्फ अपनी मनमानी की है।
ये बहुत ही शर्म की बात है कि दीक्षान्त समारोह में मुख्य अतिथि रहे कैलाश सत्यार्थी जी ने 30 हज़ार छात्रों को सम्बोधित करने की इच्छा जाहिर की किन्तु 50 हज़ार छात्रों के इस विश्वविद्यालय में आम छात्र को प्रवेश ही नहीं दिया गया।इलाहाबाद विश्वविद्यालय का इतिहास गौरवशाली रहा है।
पूर्व में दीक्षान्त समारोह में राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम को मानद उपाधि प्रदान की गई थी।यहां पर तो डीजीपी ओपी सिंह जी की अनुपस्थिति में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार एनके शुक्ल ने उनकी उपाधि प्राप्त की जो कि असंवैधानिक एवं अनुचित है। जिसपर छात्रों का एक गुट वकीलों से राय लेकर मुकदमा दर्ज करवाएगा तथा छात्र संघ बहाली की लड़ाई निरन्तर जारी रहेगी।




