हाईकोर्ट बार ने आयकर से राहत को दाखिल की याचिका

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने आयकर से राहत के लिए याचिका दाखिल की है। याचिका में 2019 में आयकर के रूप में वसूले गए साढ़े 39 लाख रुपये से अधिक की वापसी की मांग की गई है। यह धनराशि कोरोना से दिवंगत सदस्य वकीलों के परिवारों को की जा रही आर्थिक सहायता में संजीवनी का कार्य करेगी।
याचिका तैयार करने वाले जाने माने कर एवं वित्त सलाहकार ने बताया कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सदस्य वकीलों के लाभ के लिए गठित संस्था है, वह किसी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि में शामिल नहीं है। ऐसे में एसोसिएशन आयकर के दायरे में नहीं आता।
डॉ. पवन जायसवाल का कहना है कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत पंजीकृत संस्था है। एसोसिएशन सिर्फ अपने सदस्यों के आपसी लाभ के लिए कार्य करता है। म्यूचुअल बेनीफिट के लिए कार्य करने वाली संस्था की आय आयकर के दायरे से मुक्त होती है। एसोसिएशन की आमदनी का मुख्य स्रोत सदस्यों से मिलने वाला सदस्यता शुल्क और फोटो एफिडेविट से होने वाली आय है। इस आमदनी का कुछ हिस्सा फिक्स डिपॉजिट किया जाता है जिसके ब्याज से वकीलों को चिकित्सकीय सहायता देने का कार्य किया जाता है। याचिका में कहा गया है कि बार एसोसिएशन ने आयकर द्वारा जारी कर निर्धारण नोटिस के खिलाफ पुनरीक्षण अर्जी दाखिल की थी जिसका निस्तारण न करके वर्ष 2016-17 का केस भी खोल दिया गया है। इसके विरुद्ध भी अलग याचिका दाखिल की गई है।
याचिका के अनुसार आयकर विभाग ने वर्ष 2017-18 के लिए 39,68,313 रुपये आयकर के रूप में 2019 में वसूले हैं। एकपक्षीय रूप से की वसूली के विरुद्ध हाईकोर्ट बार ने आयकर विभाग मेंं पुनरीक्षण अर्जी भी दाखिल की है, जिसका अब तक निस्तारण नहीं किया गया। एसोसिशन का कहना है कि कोरोना से लगभग डेढ़ सौ वकीलों की मृत्यु हुई है जिनके परिवारों को बार की ओर से पांच-पांच लाख रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। ऐसे में वसूली गई रकम वापस मिलने से बार एसोसिएशन को अधिवक्ता परिवारों की आर्थिक सहायता में काफी मददगार साबित होगी।



