विद्युत टैरिफ को अंतिम रूप देने पर रोक

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग को वर्चुअल लोक सुनवाई के आधार पर अंतिम रूप से विद्युत टैरिफ पुनरीक्षित करने से रोक दिया है। साथ ही इस मामले में दाखिल याचिका पर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति साधना रानी ठाकुर की खंडपीठ ने अरविंद अग्रवाल व दो अन्य की याचिका पर दिया है। याचिका के अनुसार आयोग ने 21अप्रैल 2021 व 10 मई 2021 को टैरिफ पुनरीक्षित करने का प्रस्ताव किया है, जो नियम विरुद्ध होने के कारण रद्द किया जाना चाहिए। कानून व रेग्युलेशन में टैरिफ निर्धारण की विधिक प्रक्रिया का उल्लेख है, जिसके मुताबिक दो अखबारों में पब्लिक नोटिस प्रकाशित कर जन सुनवाई के बाद ही टैरिफ तय किया जा सकता है। आयोग ने 21 अप्रैल 2021 के नोटिस पर पांच मई 2021 को होने वाली सुनवाई कोविड 19 प्रकोप के कारण टाल दी। 10 मई 2021 के नोटिस पर 19 मई 2021 को सुनवाई की तिथि तय की थी। उस समय कोरोना संक्रमण पीक पर था। इसके बावजूद वर्चुअल सुनवाई की खानापूरी कर टैरिफ को अंतिम मंजूरी दी जा रही है। साथ ही याची को सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। ऐसा न कर टैरिफ को अंतिम रूप देना विधि विरुद्ध है। कोर्ट ने प्रकरण विचारणीय मानते हुए टैरिफ तय करने पर रोक लगाते हुए दी और आयोग से याचिका पर जवाब मांगा है।



