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शोध और नई तकनीक के बीच सेतु बनकर कमाए 30 लाख

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। शोध के विविध आयामों का आंकलन करने में शोधार्थियों के पसीने छूट जाते हैं। खासकर विज्ञान के शोधार्थी के लिए टॉपिक से संबंधित तकनीक व साफ्टवेयर जुटाने व विषय विशेषज्ञ को ढूंढ़ने में खासी मशक्कत करनी पड़ती है। जब तीनों एक साथ उपलब्ध हो जाए तो फिर शोध की राह काफी हद तक आसान हो जाती है। विज्ञान और तकनीक से संबंधित विषयों के शोधार्थियों की राह आसान बना रहे हैं मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनएनआईटी) के बायोटेक्नोलाजी ब्रांच से बीटेक कर चुके आनंद कुमार।

आनंद आज अपने स्टार्टअप के जरिए देश-विदेश के शोधार्थियों और नई तकनीक के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। अगस्त 2020 में ‘रीड माई कोर्स नाम के स्टार्टअप को लांच कर शोधार्थियों के लिए उनके शोध की जरूरतों के अनुसार नई तकनीक और सॉफ्वेयर की जानकारी के साथ उन क्षेत्रों के विशेषज्ञों से मदद उपलब्ध करा रहे हैं। उनकी सफलता का अंदाजा इससे ही लगाया जा सकता है कि मात्र सालभर में आनंद ने 30 लाख रुपये से अधिक की कमाई की है। इसके अलावा दर्जनों छात्रों को रोजगार भी मुहैया कराया है।
मुंगेर बिहार के कल्याणपुर गांव के आनंद कुमार ने वर्ष 2019 में एमएनएनआईटी के बायोटेक्नोलॉजी से बीटेक की डिग्री हासिल की। अगस्त 2020 में नोएडा में ‘रीड माई कोर्स ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस आदि जैसी ट्रेंडिंग तकनीकों के साथ अनुसंधान, स्वास्थ्य देखभाल, जैव प्रौद्योगिकी जैसे अध्ययन के विभिन्न क्षेत्रों में 20 से ज्यादा विशेष रूप से अनुकूलित और व्यक्तिगत पाठ्यक्रम प्रदान कर रहे हैं।
आनंद ने बताया कि आने वाले दिनों में आईआईटी, एनआईटी और आईसीएमआर जैसे शीर्ष संस्थानों और कंपनियों के साथ काम करेंगे। साथ ही आनंद एक ऑनलाइन मंच प्रदान कर रहे हैं जहां दुनिया के विभिन्न हिस्सों के प्रशिक्षक व छात्र पाठ्यक्रम में भाग ले सकते हैं। वर्तमान में, इसमें चालीस से अधिक देशों से लगभग दस हजार छात्र और एक सौ से अधिक प्रशिक्षक पंजीकृत हैं। रीड माई कोर्स स्टार्टअप के जरिए अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को नई बुलंदियों तक पहुंचाने का उनका सपना है।

कमा रहे है 40 से 50 हजार रुपये महीने

आनंद ने बताया कि स्टार्टअप के जरिए ऑनलाइन प्रशिक्षण देने वाले विषय विशेषज्ञ महीने में 40 से 50 रुपये की कमाई कर रहे हैं। उन्हें सिर्फ दो घंटे ऑनलाइन प्रशिक्षण देना पड़ रहा है।

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