ग़मज़दा माहौल में मोमबत्ती की रौशनी मे निकला ताबूत हज़रत अली जुलूस
इलाहाबद। हज़रत अली की शहादत पर तीन दिवसीय शोक के अन्तिम दिन मुस्लिम इलाक़ा अपने रहबर के जाने के ग़म मे डूबा था।

प्रातःफजिर की नमाज़ के वक्त मस्जिद काज़ी साहब बख्शी बाज़ार के आस पास मर्द स्याह लिबास और औरतें स्याह चादरों मे ग़मज़दा माहौल मे दामादे रसूल की शहादत पर पुरसा देने को जमा थे।
सबसे पहले मौलाना जव्वाद हैदर जव्वादी साहब ने नमाज़े फज्र अदा कराई। नमाज़ खत्म होते ही मसजिद की सभी लाईटों को बूझा कर मौलाना रज़ी हैदर साहब ने मजलिस पढ़ना शुरू की मौलाना ने इब्ने मुल्जिम नामक का़तिल द्वारा ज़हर बूझी तलवार से मौला अली के सर पर नमाज़ के दौरान मारने की घटना का ज़िक्र किया।
मौला अली पर दूनिया के पहले आतंकी घटना का और अली द्वारा अपने क़ातिल के दूध का कटोरा दे कर यह कहना की मेरा दूशमन प्यासा है यह र्दशाता है अली ने किसी के साथ कभी बूरा सलूक नही किया। मौलाना ने ग़मगीन मसाएब पढ़े तो हर तरफ से आहो बूका की आवाज़ गूजं उठी। या अली मौला हैदर मौला के फलक शिग़ाफ नारों के साथ मोमबत्ती की रौशनी मे शबीहे ताबूत मौला अली निकाला गया जो कांधे कांधे ग़मज़दा सोगवारों के मातमी माहौल मे खूरशैद हुसैन मरहूम के हाते मे पहूँच कर संपन्न हुआ।
रास्तेभर लोगों ने सूती रेशमी व फूलों की चादरें चढ़ा कर मन्नत व मुरादें मांगी।वहीं दूसरा जुलूस इमामबाड़ा आज़म हुसैन रानी मण्डी से अनजूमन अब्बासिया तथा एक अन्य जुलूस आबिदया इमाम बाड़े से मिर्ज़ा काज़िम अली की सरपरस्ती मे निकला जो अपने परमपरागत मार्ग रानी मण्डी, बच्चा जी धरमशाला,कोतवाली,नखास कोहना खुलदाबाद, हिम्मतगंज होते हूए चकीया स्थित करबला पहुंच कर सम्पन्न हुआ।
जुलूस मे अलम ,ताबूत व ज़ूल्जनाह की शबीह भी साथ साथ थी जिसपर अक़िदतमंदों ने फूल माला चढा कर मन्नतें व मुरादें मांगी।जुलूस मे डा०रिज़वान हैदर, हसन नक़वी,मंज़र कर्रार ,सै०मो०असकरी,मिर्जा अज़ादार हुसैन,शाहिद प्रधान ,शादाब ज़मन आसिफ रिज़वी,मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी,असकरी अब्बास राग़िब हसन,अनीस रिज़वी समेत अन्य सैकड़ों लोग मौजूद थै।



