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तालाब सुंदरीकरण प्रोजेक्ट की जांच करेगी एसआईटी

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार) । रामपुर जिले के पनवडिया गांव के तालाब के सुंदरीकरण की योजना की उपयोगिता का परीक्षण किए बगैर 796.89 लाख रुपये की मंजूरी और 300 लाख की जारी किश्त हड़प कर छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अख्तियार किया है।

 

 

 

कोर्ट ने ब्यूरोक्रेसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। नीचे से ऊपर तक के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया है। प्रमुख सचिव शहरी योजना एवं विकास की अध्यक्षता में डीआईजी मुरादाबाद की दो सदस्यीय टीम गठित की गई है।
कोर्ट ने कहा कि 300 लाख खर्च के बाद प्रोजेक्ट रोक दिया गया। टैक्स पेयर्स का पैसा नौकरशाही के गलत फैसले के कारण हड़प लिया गया। तालाब नगर की सीमा से बाहर है फिर भी डीपीआर नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी ने तैयार किया। सरकार में बैठे बड़े अधिकारियों ने बगैर जांच के मंजूरी दे दी। और 40 फीसदी काम होने के बाद जिलाधिकारी ने एडीएम के नेतृत्व में जांच कमेटी बना दी। उसने भारी घपले का खुलासा किया। कहा प्रोजेक्ट की कोई उपयोगिता नहीं है। प्लांट भी एक दूसरे से काफी दूर है। घपला 2016-17 का है। एफआईआर 2019 में नायब तहसीलदार ने लिखाई। चार छोटे अधिकारियों को नामजद किया। सचिव पंचायती राज नोडल अधिकारी लखनऊ ने कहा कि बिना उपयोगिता की जांच प्रोजेक्ट मंजूरी की हाई लेवल जांच होनी चाहिए। जांच टीम ने 27 मई 2019 को रिपोर्ट पेश की। तब एफआइआर दर्ज कराई गई।
कोर्ट ने जांच रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी न करते हुए कहा कि छोटे अधिकारियों पर आपराधिक केस से अपेक्षित परिणाम नहीं मिलेगा। जब प्रोजेक्ट ही सही नहीं था तो डीपीआर तैयार कराने के लिए कौन जिम्मेदार है। फाल्टी प्रोजेक्ट की मंजूरी और किश्त का भुगतान करने की किसकी जवाबदेही है। इसका पता लगाया जाना चाहिए। प्रोजेक्ट अधर में है, जनता के पैसे बर्बाद हो गये। सरकारी धन की लूट का यह अक्षम्य पाप है। सरकारी नुक्सान की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।

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