दवा की खोज प्रक्रिया में कम्प्यूटर बहुत सहायक : निदेशक
( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, प्रयागराज में दवा की खोज में कम्प्यूटर की सहायता से डिजाइन विषय पर पांच दिवसीय संकाय विकास कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए ट्रिपल आईटी के निदेशक प्रो. पी. नागभूषण ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन सीखने के तरीकों में हालिया प्रगति ने दवा खोज प्रक्रिया में दवा से सम्बंधित बड़े डेटा के विश्लेषण, सीखने और समझाने में बहुत सहायता की है।
ट्रिपल आईटी में ‘दवा की खोज में कम्प्यूटर’ पर पांच दिवसीय कार्यक्रम
कार्यक्रम की शुरूआत झलवा परिसर में सोमवार को ऑनलाइन माध्यम से हुई। निदेशक ने प्रभावी दवाओं के डिजाइन में आईटी से सम्बंधित तकनीकों के महत्व पर अपने विचार रखे। उन्होंने कम्प्यूटर सहायता प्राप्त दवा डिजाइन और खोज से सम्बंधित बहु-अनुशासनात्मक दृष्टिकोणों की सराहना की। टी.आई.जी.एस बेंगलुरु के निदेशक डॉ.राकेश मिश्रा ने नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) पर अपनी अंतर्दृष्टि साझा किया। उन्होंने चिकित्सा सम्बंधी अनुसंधान में एनजीएस की भूमिका के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कोविड वायरस के वेरिएंट और उनमें होने वाले म्यूटेशन का उदाहरण दिया। कहा कि जीनोमिक जानकारी के आधार पर टारगेटेड थैरेपी और स्टैंडर्ड थैरेपी की जाएगी।
प्रो. कृष्ण मिश्रा ने व्यक्तिगत चिकित्सा-फार्मा सूचना विज्ञान के भविष्य के बारे में चर्चा की। उन्होंने प्रतिभागियों को इन-सिलिको ड्रग डिजाइन के बारे में भी बताया। प्रो. विजयश्री तिवारी, रजिस्ट्रार ने आईटी सक्षम दवाओं की भूमिका पर जोर दिया। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. निधि मिश्रा ने अटल प्रायोजित संकाय विकास कार्यक्रम के कई पहलुओं पर प्रकाश डाला। कहा कि सीएडीडी सम्भावित लीड यौगिकों को खोजने और विभिन्न प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए नई दवाओं के निर्माण में सहायता करने के लिए एक शक्तिशाली उपकरण के रूप में उभरा है।




