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जश्ने यौमे पैदाईश ए पैगम्बर की महफिल मे शायरों ने पढ़े एक से बढ़ कर एक अशआर

मेरे भाई चलो हम बाँट लें मिल कर बराबर से!मदीने से हवा आई है लेकर प्यार की खुशबू !!

हफ्ता ए वहदत के तहत आमदे रसूल ए अकरम पर शिया समुदाय की ओर से जगहा जगहा सजी महफिल

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दरियाबाद रानीमण्डी करैली सहित अन्य मोहल्लों मे हफता ए वहदत के तौर पर बाराह रबीउल अव्वल से सत्राह रबीउल अव्वल तक पैग़म्बरे इसलाम मोहम्मदे मुस्तफा (स०अ०व०) की आमद की खुशी मे शायराना महफिल का आयोजन किया गया।दरियाबाद असग़र मन्ज़िल मे अन्जुमन नक़विया रजिस्टर्रड की ओर से जश्ने मुस्तफा का आयोजन हसन नक़वी के आवास पर मौलाना अली गौहर साहब क़िबला की सदारत और शायर रौनक़ सफीपुरी के संचालन मे किया गया।देर रात तक चली महफिल मे शायरों ने एक से बढ़ कर एक अशआर पढ़ कर महफिल को खुशनूमा बना दिया।शायर रुसतम साबरी ने पढ़ा।

मदीने का तसव्वुर जब मेरे अरमान मे आया!मुझे ऐसा लगा मै खुल्द के ऐवान मे आया!!

मोहम्मद की अताअत इश्क़े हैदर शाह का मातम!यही सब वह अमल है जिनसे मैं पहचान मे आया!!

शायर अमन इलाहाबादी ने कुछ इस अन्दाज़ मे अपनी बात कही।

याद आएगी हमे अपने नबी की सीरत!जब भी काँटों से भरी राहे गुज़र देखेंगे!!

शायर बाबर ज़हीर ने अपने तास्सुरात का कुछ इस अन्दाज़ मे ज़िक्र किया।

मेरे भाई चलो हम बाँट ले मिल कर बराबर से!मदीने से हवा आई है लेकर प्यार की खुशबू!!

शायर रौनक़ सफीपूरी ने अपने निज़ामत के बीच कुछ इस अन्दाज़ मे आपसी भाईचारे का पैग़ाम देते हुए पढ़ा।

17 हो या 12 हो कोई फर्क़ नहीं पड़ता!अलग़रज़ मदहा का दफ्तर है माहे रबीउल अव्वल!!

बुज़ुर्ग शायर व मशहूर नौहाख्वान हीरा साहब ने पढ़ा।

हर एक क़दम पर मुझे मंज़िल का गुमाँ है!छिपता है छिपाने से कहीं राज़े मोहब्बत

शायर डॉ क़मर आब्दी ने पढ़ा।

होते ही मस्स जनाबे रेसालत मआब से!ज़र्रे नज़र मिलाने लगे आफताब से!!*

शायर नजीब इलाहाबाद ने भी अपने कलाम से वाह वाही बटोरी।वहीं रानीमण्डी इमामबारगाह मीर हुसैनी मे रसूले पाक व इमाम जाफरे सादिक़ की यौमे पैदाईश पर जश्न की महफिल सजी। मौलाना रज़ी हैदर ने तफसीली फज़ायल पढ़े और पैग़म्बरे इसलाम के पैग़ाम को आम किया।आयोजक मण्डल के सै०अदील हुसैन ,सै०अक़ील हुसैन व ज़ैग़म हुसैन की देखरेख मे शायर ज़की अहसन ,शायर अनवार अब्बास ,शायर व मौलाना आमिरुर रिज़वी ,शायर डॉ क़मर आब्दी दरियाबादी ,शायर शहंशाह हुसैन सोनवी ,शायर काशिफ मौलाई ने शाने मुस्तफा व इमाम जाफरे सादिक़ की फज़ीलतों को उजागर करते हुए एक से बढ़ कर एक अशआर पढ़े।महफिल का संचालन नाज़िमे नजफे अशरफ आफताबे निज़ामत नजीब रज़ा इलाहाबादी ने एक एक शायर को अपने सधे अलफाज़ो से नवाज़ते हुए मंच पर आमंत्रित कर महफिल मे चार चाँद लगा दिए।महफिल मे मौलाना ज़ायर हुसैन ,मौलाना जव्वाद हैदर रिज़वी ,सिबते रिज़वी ,डॉ फाज़िल हाशमी ,हसन नक़वी ,क़िबला नक़वी ,शानू नक़वी ,गौहर काज़मी ,मिर्जा काज़िम अली सै०मो०अस्करी हसन रिज़वी ,शाहिद अब्बास रिज़वी असद जाफरी ,शीराज़ जाफरी भय्यू भाई आदि लोग मौजूद रहे।

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