नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ महोत्सव शुरू

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय छठ महोत्सव शुरू हो गया। सुबह से ही पूर्वांचल समाज की महिलाएं बलुआ घाट गऊघाट संगम क्षेत्र समेत अन्य गंगा घाटों पर आस्था की डुबकी लगाने पहुंची। छठ व्रतियों ने गंगा स्नान कर कलश में जल भरा और अपने निवास पहुंचकर पूजा स्थल पर व्रत के लिए कलश की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने लौकी की सब्जी, चने की दाल और भात खाया। साथ ही खरने की तैयारियां शुरू की।
खरना आज, व्रती महिलाएं तैयार करेंगी खीर-रोटी का प्रसाद
छठ सूर्योपासना का पर्व है। सारे ब्रह्मांड का चराचर जीव भगवान सूर्य से ऊर्जा पाते हैं। पृथ्वी पर जीवन भगवान भास्कर के कारण ही संभव है। पूर्वांचल ही नहीं, अब दूसरे प्रदेशों में भी जहां पूर्वांचल के लोग बसे हैं वहां पूरे भक्ति भाव से छठ त्योहार मनाया जाता है। सौभाग्य, आरोग्य, शांति, खुशहाली, संतान प्राप्ति की कामना के साथ छठ व्रती चार दिनों तक उपासना में लीन रहते हैं। पूर्वांचल निवासी संजय सिंह ने बताया कि नहाय-खाय के अगले दिन मंगलवार को लोहंडा यानि खरना का अनुष्ठान होगा। इस दिन 24 घंटे निराहार रहकर व्रती महिलाएं साठी के चावल और गुड़ की बनी खीर और रोटी प्रसाद रूप में अर्पित करेंगी। बुधवार को गंगा किनारे अस्ताचलगामी और गुरुवार को उदीयमान भास्कर देव को अर्घ्य देने के साथ चार दिनी छठ महाव्रत का समापन होगा।
मांगल गीतों के साथ भोग सामग्री की तैयारी
अस्ताचलगामी और उदीयमान भास्कर देव को नाना प्रकार के मौसमी फल और पकवानों से अर्घ्य दिया जाता है। महाप्रसाद की तैयारी भी सोमवार से शुरू हो गई है। पूर्ण शुद्धता और सतर्कता के साथ सुखाए गेहूं को हाथ की चक्की से पीसकर साथ ही मांगल गीतों का गान कर भोग सामग्री तैयार की जाती है। उत्तरी हरिद्वार में व्रतियों ने महाप्रसाद के लिए सामूहिक रूप से आटा तैयार किया।

छठ महापर्व की खरीदारी करते महिलाएं । ( छाया अनुराग शुक्ला )

संगम किनारे छठ मैया की पूजा करने के लिए घाट किनारे बेदी बना कर घेराबंदी किया। ( छाया अनुराग शुक्ला )

छठ मैया की व्रती महिलाएं खरना बनाकर भोग का प्रसाद लगाते हुए । (छाया अनुराग शुक्ला )

नहाए खाए के बाद कलश स्थापना कर पूजन करती छठ व्रती महिलाएं। ( छाया अनुराग शुक्ला )




