सीबीआइ ने माना,नहीं किया गया था महंत का कत्ल सीबीआइ की जांच में यह तथ्य सामने आया

तीन लोगोंं ने देखा था महंंत का कथित अश्लील वीडियो जिसकी वजह से दी जान
आनंद गिरि ने निरंजनी अखाड़े का किया था दौरा
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में जेल में बंद आनंद गिरि की वसीयत छिनने के पीछे उनका धर्म-विरोधी आचरण रहा। विदेश में जाकर वह मठ, मंदिर और अपने गुरु महंत नरेंद्र गिरि की छवि को धूमिल कर रहे थे। इसी से आहत होकर महंत ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी न बनाते हुए बलवीर गिरि के नाम वसीयत कर दी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआइ) की ओर से कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट में इसका पर्दाफाश हुआ है।
सीबीआइ की जांच में पता चला है कि चार जून 2021 को महंत ने एक नई वसीयत को अंजाम दिया था, जिसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपने उत्तराधिकारी के रूप मेंं नामित किया। पूर्व में नामित किए गए आनंद गिरि को हटा दिया था। इसमें नरेंद्र गिरि ने उल्लेखित किया था कि आनंद गिरि विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए अक्सर विदेशों का दौरा करते हैं। आनंद ने खुद को विदेश में धर्म-विरोधी गतिविधियों में शामिल किया था। इस कारण मठ बाघम्बरी गद्दी, लेटे हनुमान मंदिर और महंत की प्रतिष्ठा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगड़ रही थी। आगे जांच में यह बात भी सामने आई कि आनंद गिरि ने हरिद्वार के श्यामपुर शैली में विक्रम योग पीठ के नाम से आश्रम का निर्माण कराया, मगर इसकी अनुमति भी गुरू से नहीं ली। इसके चलते महंत नरेंद्र गिरि उनसे नाराज हो गए थे।
*पंच परमेश्वर को लिखे पत्र में किया कुकर्मों का उल्लेख*
12 मई को महंत ने निरंजनी अखाड़ा हरिद्वार के पंच परमेश्वर को पत्र लिखकर आनंद गिरि द्वारा किए जा रहे कुकर्मों का उल्लेख करते हुए उसे निरंजनी अखाड़े से निष्कासित करने का अनुरोध किया था। यह भी कहा था कि आनंद को बाघम्बरी गद्दी और हनुमान मंदिर से पहले से निष्कासित कर दिया गया था। महंत ने गद्दी और मंदिर के धन का दुरुपयोग का आरोप भी आनंद गिरि पर लगाया था। साथ ही परिवार से संबंध बनाने को संयासी की परंपरा के खिलाफ बताया था।
सुमित ने खुद को उत्तराधिकारी बनाने का दिया था सुझाव
जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि कोरोना संक्रमण होने पर महंत को 12 अप्रैल को ऋषिकेस एम्स में भर्ती कराया गया था। उस दौरान सुमित तिवारी बीमार महंत की देखभाल कर रहा था। उसने महंत को देखने के बाद आशंका जताई कि शायद वह कुछ दिनों में मर जाएंगे। तब उसने महंत से खुद को उत्तराधिकारी नामित करने का सुझाव दिया था। जौनपुर के मुंगराबादशाहपुर निवासी सुमित मठ स्थित श्रीमहंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय का विद्यार्थी है। वह महंत के साथ हरिद्वार गया था।
*आनंद गिरि ने निरंजनी अखाड़े का किया था दौरा*
दरअसल, 25 फरवरी 2021 को महंत नरेंद्र गिरि हरिद्वार गए थे और उनके साथ सुमित तिवारी भी थे। दोनों 14 मार्च तक हरिद्वार के मुल्तानी माढ़ी निरंजनी अखाड़ा में रहे। इस दौरान आनंद गिरि ने निरंजनी अखाड़े का दौरा किया था। तब उसने सुमित को बताया कि महंत बाघम्बरी गद्दी की जमीन का एक बड़ा हिस्सा अपने परिवार के सदस्यों और स्वयं के फायदे के लिए बेच दिया था। उसने यह भी आरोप लगाया था कि महंत मठ के परिसर में स्थित गोशाला की जमीन बेचना चाहते थे और इसके लिए उन्होंने डा. यूबी यादव से डेढ़ करोड़ रुपये लिए थे।
*श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के परिसर का एक हिस्सा बेचने की थी तैयारी*
अल्लापुर स्थित श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी के परिसर का एक हिस्सा बेचने की तैयारी थी। इसके लिए महंत के मुखिया रहे नरेंद्र गिरि ने शहर के चर्चित हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. यूबी यादव से डेढ़ करोड़ रुपये में डील की थी। इतना ही नहीं, कई बिल्डर और रियल एस्टेट कारोबारी से भी महंत के अच्छे संबंध थे। नरेंद्र गिरि ने अपने सुसाइड नोट में जमीन के कारोबार से जुड़े दो लोगों को उल्लेख करते हुए उनसे पैसे के लेनदेन का जिक्र किया था। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो सीबीआइ की ओर से कोर्ट में दाखिल किए गए आरोप पत्र में ऐसे ही कई और सनसनीखेज तथ्यों का पर्दाफाश हुआ है। हालांकि सीबीआइ की जांच के दौरान यह तथ्य जरूर सामने आया कि महंत जमीन बेचने के इच्छुक थे, जिसका आनंद गिरि विरोध करे थे, मगर पैसे लेने की पुष्टि नहीं हो सकी। जांच एजेंसी को यह भी पता चला है कि महंत नरेंद्र गिरि को हरिद्वार में भी कुछ इच्छुक पार्टियों द्वारा पैसा दिया गया था। वह भी महंत से जमीन खरीदना चाहते थे, लेकिन पैसा देने वाले शख्स भुगतान का साक्ष्य नहीं उपलब्ध करा सके थे।
आनंद की रिहाई को आस्ट्रेलिया भेजी गई थी बड़ी रकम
सीबीआइ की जांच में इस बात का भी पर्दाफाश हुआ है कि आनंद गिरि की रिहाई केे लिए महंत नरेंद्र गिरि ने बड़ी रकम आस्ट्रेलिया भेजी थी। साथ ही अपने राजीनीतिक संबंधों को इस्तेमाल किया गया था। मई 2019 में आनंद गिरि को आस्ट्रेलिया में छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। तब मठ और अपने शिष्य की साख को बचाने के लिए नरेंद्र गिरि ने पैसा भेजने के साथ राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल किया था। इसके चलते ही आनंद गिरि की रिहाई हुई और वह सुरक्षित रूप से भारत वापस लौटे थे।




