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आपसी झगडे में मौत है मानव वध: हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपसी झगडे में हुई मौत पर हत्या को मानव वध करार देते हुए आरोपी को सत्र न्यायालय से हुई आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी है। साथ जेल में बिताई गई 11 वर्ष 11 माह की अवधि को सजा के लिए पर्याप्त माना है।

कोर्ट ने इसी के साथ आरोपी की तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। यह निर्णय न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर एवं न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव की खंडपीठ ने अलीगढ के श्रवण की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि घटना के चश्मदीद गवाह हैं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हैमरेज व शॉक बताया गया है। यह साक्ष्य नहीं है कि हत्या की योजना थी। अचानक झगड़ा हुआ और जिसके चलते मौत हो गई, जिसे हत्या नहीं कहा जा सकता।

इसलिए आरोपी मानव वध का दोषी है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी रिहा होने के तीन माह के भीतर 50 हजार रुपये बतौर मुआवजा जमा करे, जो मृतक के माता-पिता को दिया जाए।

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