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ऋषि गंगा त्रासदी पर सदन में चर्चा ना होना दुर्भाग्यपूर्ण-कुंवर रेवती रमण

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। राज्यसभा सांसद कुंवर रेवती रमण सिंह ने ऋषि गंगा त्रासदी पर केंद्र सरकार के असंवेदनशील रवैये की निंदा करते हुए कहा कि जब बजट सत्र चल रहा था उसी समय इतनी बड़ी त्रासदी होती हैं जिसमें सैकड़ों लोगों की जान जाती हैं पर मोदी सरकार सदन में इस पर कोई चर्चा नहीं करतीं हैं यह सरकार की मानवीय मूल्यों के प्रति असंवेदनशीलता प्रकट करता है।सांसद ने कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का दोहन विनाश का कारण बन रहा है हिमालय पर्वत श्रंखला कच्चा पहाड़ हैं उसपर भारी-भारी मशीनों और ब्लास्ट से सुरंग निर्माण पहाड़ को खोखला कर रही हैं जिससें पहाड़ कमजोर हो कर टूट रहे हैं और लाखों की संख्या में देवदार के पेड़ काटे जा रहे हैं देवदार पत्थरों मे खुद होती हैं इसकी रोपाई नहीं होती हैं।

250 लोगों की जान जाने के बाद भी सरकार असंवेदनशील

देवदार पौधों की जड़ें मिट्टी और पत्थर को बांधे रहती हैं उनकी अन्धाधुंध कटाई से पहाड़ों की पकड़ कमजोर हो रही हैं जो बर्फ का दबाव बर्दाश्त नहीं कर पाते और हिमस्खलन हो जाता हैं जिसमें पत्थर और गाद भारी मात्रा में नदियों में जमा होता हैं जो वर्षा ऋतु में शहरों में बाढ़ बनाती हैं उन्होंने कहा कि महामना मालवीय जी ने अपनी जीवनीय मे बांगड़ नागल बांध के टूटने पर चिंता व्यक्त किया था जो की टेहरी बांध से बहुत ही छोटा है आज का टेहरी बांध जिस दिन किसी दैवीय प्रकोप का शिकार होगा तो दिल्ली सहित उत्तर भारत के कई जिले तबाह हो जायेंगे इसलिए बांधों के निर्माण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगना चाहिए।
सांसद ने कहा कि केदारनाथ त्रासदी और ऋषि गंगा चमोली त्रासदी से सबक लेते हुए सदन में व्यापक रूप से चर्चा होनी चाहिये कि ऊर्जा के लिए वैकल्पिक श्रोत का इस्तेमाल हो जिसमें सौर ऊर्जा भी है और बड़े बड़े विनाशकारी बांधों को तोड़ देना चाहिए जिससे करोड़ों भारतीयों के आस्था की जीवनदायनी गंगा अविरल हो कर निर्मल हो जाय।

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