कपड़े जूते चप्पल ईट पर जीएसटी बढ़ाए जाने के विरोध में डीएम को सपाइयों ने सौपा ज्ञापन

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज समाजवादी व्यापार सभा के प्रदेश उपाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में कपड़ा जूता चप्पल ईट पर जीएसटी बढ़ाए जाने विरोध में वित्त मंत्री भारत सरकार के नाम जिला अधिकारी कार्यालय प्रयागराज मे प्रशासनिक अधिकारी एम एस सिद्दीकी को ज्ञापन सौंपा गया। इस अवसर पर दुर्गा प्रसाद गुप्ता व प्रदेश सचिव विजय गुप्ता ने कहा कि कपड़े व फुटवियर पर 1 जनवरी 2022 से जीएसटी बढ़ाने व ईंट पर भी जीएसटी बढ़ाने के नोटबन्दी,जीएसटी, लौकडाउन से पहले ही व्यापारी बर्बाद हो चुके हैं।आपकी व्यापारी विरोधी नीतियों से जन्मीं परिस्तिथियों की वजह से व्यापारी आत्महत्या तंक के लिए मजबूर हुए हैं।आपकी सरकार की गलत नीतियों के कारण व्यापारी बर्बाद हैं और अपने अस्तित्व के लिए चिंतित है।और ऐसे में राहत देने की जगह आपकी सरकार जीवनयापन के लिए सबसे अहम कपड़े,इंट व फुटवियर जूतों,चप्पल आदि। पर टैक्स 5 की जगह 12 प्रतिशत बढाके इस व्यापार से जुड़े दुकानदारों, उद्यमियों व भट्टा मालिकों को मौत की शैया पर धकेलने का काम कर रही है।
इससे देश विदेश की चुनिंदा बड़ी कंपनियां फायदे में रहेंगी जबकि छोटे व मध्यम वर्गीय व्यापारी व दुकानदार बर्बाद होंगे। कपड़े ईंट व फुटवियर पर जीएसटी 5% से बढ़ाकर 12% प्रतिशत करना भाजपा की सरकार की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य राजेश गुप्ता और महानगर अध्यक्ष शिव शंकर केसरवानी ने कहा इससे कपड़े कम्बल पर्द सुतली की नुकीले जाल, रस्सी, तिरपाल, शामियाना, जूते,हवाई चप्पल,ईंट इत्यदि सभी सामान मंहगे हो जाएंगे। व्यापार के लिए परेशान छोटे व मध्यमवर्गीय व्यापारी इससे बर्बाद हो जाएंगे।बड़ी ब्रांडेड कंपनियों व विदेशी कंपनियां ही इससे फायदे में रहेंगी क्योंकि छोटा व्यापारी बढ़े टैक्स के अनुरूप कपड़े,जूते या चप्पल की कीमत तो बढ़ा नहीं पाएंगे और बड़ी कंपनियां इसका फायदा उठाएंगी क्योंकि उनका मार्जिन पहले ही बड़ा होता है और वो इसमें बढ़े जीएसटी को भी समायोजित कर लेंगीं।इससे छोटे व्यापारियों व उद्योगों को बड़े व विदेशी ब्रांडों से मुकाबला करना और कठिन हो जाएगा।पहले ही जूते चप्पल की बनवाई में ज़रूरी कच्चे माल की कीमत एक साल में तीन गुना बढ़ गई है।
साथ ही कपड़े व फुटवियर व्यापार में आईटीसी सम्बंधी बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।कपड़े जूते ईंट व चप्पल को आप मर्सिडीज गाड़ी की तरह नहीं देख सकते। सरकार को कोई सरोकार व्यापारी व जनता की कठिनाई को लेकर नही है। आप की सरकार को तो कच्चे माल पर जीएसटी कम कर व्यापारियों को राहत देनी चाहिए।आपके इस निर्णय से इंस्पेक्टराज बढ़ेगा जिससे की उत्पीड़न बढ़ेगा। पहले से ही परेशान छोटा व मध्यम व्यापारी जीएसटी के नाम पर और उत्पीड़न नहीं बर्दाश्त कर पाएगा। टैक्स बढ़ा तो एमएसएमई इकाइयों व ईंट भट्ठे की बंदी तय है। हवाई और प्लास्टिक चप्पलें तो बेसिक श्रेणी में आती हैं।जीएसटी से पहले 300 तंक की चप्पल पर टैक्स भी नहीं था।5 प्रतिशत टैक्स से ही कई समस्याएं उतपन्न हुईं और अब 12 प्रतिशत से तो इसका सीधा भार गरीब पर पड़ेगा।देश का 85 प्रतिशत वर्ग सस्ता कपड़ा व चप्पलें पहनता है। कोयला,डीजल व पेट्रोल कीमत में बेतहाशा बढ़ोतरी जारी है। वहीं बालू व मिट्टी की कमी भी ईंट निर्माताओं की सबसे बड़ी परेशानी है। दो साल से ईंट का उत्पादन घटकर आधा हो चुका है
इसका सीधा असर आमजनता पर पड़ेगा।इस घोषणा का असर सबसे ज्यादा छोटे व्यापारियों पर पड़ेगा। कोरोना काल में सबसे अधिक वस्त्र व फुटवियर व्यवसाय ही प्रभावित हुआ था। नोटबन्दी,विसंगतिपूर्ण जीएसटी व कोरोना से व्यापारी उबर भी नहीं पाया क़ी सरकार ने जीएसटी बढ़ाने की घोषणा कर दी।
इससे व्यापार पर असर पड़ेगा। जीएसटी की दर बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। ई-कॉमर्स कंपनियों ने पहले ही व्यापार पर प्रतिकूल असर डाल रखा है। अब जो वर्ग ऑफलाइन खरीदारी ज्यादा करता है, उसकी जेब पर भी बोझ बढ़ेगा। राष्ट्रहित में व छोटे व्यापारियों के हित में कपड़े,ईंट व फुटवियर पर टैक्स बढ़ौतरी के निर्णय को वापस लेकर जीएसटी सरलीकरण पर ध्यान दिया जाए। ज्ञापन सौंपने वाले में श्री सर्व अशोक गुप्ता लालजी यादव युसूफ अंसारी गणेश साहू सावित्री सिंह कलावती गुप्ता रोशन अंसारी तरवेज अंसारी अश्वनी जायसवाल अब्दुल मन्नान मनोज गुप्ता योगेंद्र विश्वकर्मा प्रसाद विश्वकर्मा निसार अहमद विकास केसरवानी आदि उपस्थित रहे।



