
आज़मगढ़श्री। श्री १००८ मीतादास आश्रम हरिश्चंद्रपुर ठेकमा आज़मगढ़ में आश्रम के महंत श्री बजरंगमुनि उदासीन जी (मां बगलामुखी उपासक) द्वारा शारदीय नवरात्रि में राम मंदिर के निर्माण व राष्ट्र रक्षा की कामना से शाम 7 बजे से माँ की इच्छा तक 9 दिवसीय माँ बंगलामुखी हवन किया जाएगा।।
यह महायज्ञ भारत की सुरक्षा और समृद्धि के लिए किया जा रहा है।। महंत बजरंगमुनि उदासीन ने बताया कि यज्ञ में भारत को आंतरिक और बाह्य व्यवधानों से मुक्त कराने के लिए माँ बंगलामुखी से विनती की जाएगी,उन्होंने बताया कि बगलामुखी तन्त्र की दसमहाविद्या में अष्टम महाविद्या है। ये आंतरिक ऊर्जा की टेक्निकल व्याख्या है। इन्हें पीताम्बरा भी कहते हैं।
यह स्तम्भन, दमन, विजय की शक्ति है। कहते हैं कि समूचे ब्रह्माण्ड की ऊर्जा इसके द्वारा प्रदत्त शक्ति का सामना नहीं कर सकती। इस महाविद्या का प्राकट्य स्वयं की आन्तरिक नकारात्मकता के लिए हुआ था। पर कालांतर में इसका प्रयोग विजय, शत्रु स्तंभन, शत्रुनाश, वाद विवाद और युद्ध में में विजय के लिए ही किया गया। ये उपासना द्विभुजी और चतुर्भुजी रूप में की जाती है। जब ऊर्जा दक्षिणमार्गी होकर दक्षिणाम्नायात्मक होती है तब द्विभुजी होती है और जब विपरीत जाकर ऊर्ध्वाम्नायात्मक होती है तो चतुर्भुज हो जाती है।
भगवती बगलामुखी की शत्रु स्तंभन साधना में मूलत: सिर्फ़ और सिर्फ़ पीले रंग के ही प्रयोग का विधान प्राचीन शास्त्रों में मिलता है।।देश में राष्ट्रवाद का माहौल बनाने की माँ बंगलामुखी से प्रार्थना की जाएगी।। महंत बजरंगमुनि उदासीनके सान्निध्य में भक्त आहुतियां देंगे।।महंत बजरंगमुनि उदासीनके मुताबिक, भगवती बगलामुखी राज व्यवस्था की देवी है.
वेद पुराण में भी उनका जिक्र है
अतः समस्त भक्तजनों को सूचित किया जाता है कि मां के आशीर्वाद को प्राप्त करें और अपने दुःख, दारिद्र के शमन के लिए माँ को आहुति अर्पित करें।।


