जीवन के चार विष शत्रु बाधा, कलह, तिरस्कार, भय जिसे दूर करतीं हैं माँ बगलामुखी-महंत बजरंगमुनि उदासीन

इलाहाबाद। ॐ बगलामुखी देव्यै ह्लीं ह्रीं क्लीं शत्रु नाशं कुरु।
जीवन में अमृतत्व प्राप्ति में चार बड़े विष हैं, जिनके रहते जीवन में आनन्द आ ही नहीं सकता, ये जीवन के चार विष हैं – 1. शत्रु बाधा, 2. कलह, 3. तिरस्कार, 4. भय।* ये चारों स्थितियां विष हैं, और विष को अपने आप से दूर करने का, इस विष को नष्ट करने का एक मात्र उपाय है – ‘गुरु कृपा से बगलामुखी सिद्धि’। महंत बजरंगमुनि उदासीन महराज ने यह विचार बगलामुखी यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते व्यक्त किये।

महंत बजरंगमुनि उदासीन महराज ने बताया कि भगवती बगलामुखी के ध्यान से स्पष्ट हो जाता है कि बगलामुखी अमृतत्व प्राप्ति के मार्ग में आने वाले शत्रु, कलह, तिरस्कार और भय (विष रूपी) को पूर्ण रूप से समाप्त कर देती हैं। देवी विरोधियों – शत्रुओं की वाणी एवं बुद्धि को ही कुंठित कर देती है, जिससे शत्रु आपके प्रति षड्यंत्र नहीं कर सकते।

वाणी का कीलन एवं बुद्धि का नाश कर देने से शत्रु आपके जीवन में बाधाएं, कलह एवं समस्याएं उत्पन्न नहीं कर सकते। बगलामुखी शत्रुओं की प्रगति, उन्नति ही समाप्त कर देती है। शत्रु पक्ष उसके भक्तों का तिरस्कार नहीं कर सकता और भय पैदा करने वाले शत्रुओं को अपने प्रहार से चूर-चूर कर समाप्त ही कर देती है अर्थात् मात्र बगलामुखी देवी की साधना-आराधना द्वारा जीवन की सभी बाधाओं और समस्याओं को समाप्त कर आनन्द एवं प्रसन्नतापूर्वक जीवन व्यतीत कर सकता है।

बगलाशक्ति का मूल सूत्र है ‘अथर्वा प्राण सूत्र’। ये प्राण सूत्र प्रत्येक प्राणी में सुप्त अवस्था में होता है और सिद्धि द्वारा इसे चैतन्य किया जा सकता है। जब यह सूत्र जाग्रत हो जाता है, तो व्यक्ति अपने जीवन में स्तम्भन, वशीकरण और कीलन की शक्ति प्राप्त कर सकता है।

ब्रह्मास्त्र की अचूक क्षमता का बल तथा शत्रुओं को सहज ही स्तम्भित कर देने का प्रभाव लिए ही तो अवतरित होती हैं पीताम्बरा देवी अपने साधक के जीवन में। स्वर्ण आसन पर स्वर्णिम आभा के साथ आसीन, पीत वस्त्रों को धारण किए, मस्तक पर चन्द्रमा को धारण करने वाली त्रिनेत्री देवी बगलामुखी का तो सम्पूर्ण स्वरूप ही मातृमय है। साधक के लिए तो ये देवी मातृमय स्वरूप हैं।
शत्रुनाशिनी श्री बगलामुखी का परिचय भौतिकरूप में शत्रुओं का शमन करने की इच्छा रखने वाली तथा आध्यात्मिक रूप में परमात्मा की संहार शक्ति हैं। पीताम्बरा विद्या के नाम से विख्यात बगलामुखी की साधना प्रायः शत्रु भय से मुक्ति और वाक् सिद्धि के लिए की जाती है।
दस महाविद्याओं में भी बगलामुखी के बारे में विशेष लिखा गया है और कहा गया है कि यह शिव की त्रि-शक्ति है।
सत्य काली च श्री विद्या कमला भुवनेश्वरी।
सिद्ध विद्या महेशनि त्रिशक्तिबर्गला शिवे॥
तंत्र शास्त्र में इसे ब्रह्मास्त्र, स्तंभिनी विद्या, मंत्र संजीवनी विद्या तथा प्राणी प्रज्ञापहारका एवं षट्कर्माधार विद्या के नाम से भी अभिहित किया गया है।।
सांख्यायन तंत्र के अनुसार कलौ जागर्ति पीताम्बरा अर्थात् कलियुग के तमाम संकटों के निराकरण में भगवती पीताम्बरा की साधना उत्तम मानी गई है। अतः आधि व्याधि से त्रस्त मानव मां पीताम्बरा की साधना कर अत्यन्त विस्मयोत्पादक अलौकिक सिद्घियों को अर्जित कर अपनी समस्त अभिलाषाओं को पूर्ण कर सकता है।




