कुंभ

यज्ञ से सभी मनोरथों की प्राप्ति होती है -शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द

मोतिहारी,बिहार ( अनुराग दर्शन समाचार ) । मोतिहारी में प्रख्यात शिक्षाविद्, समाजसेवी डा० शम्भू नाथ सीकरिया द्वारा आयोजित अश्वमेध यज्ञ का शुभारम्भ श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज द्वारा किया गया | सर्व प्रथम पूज्य शंकराचार्य जी महाराज द्वारा अश्व पूजन कर अश्व को भ्रमण के लिये छोड़ा गया | तत्पश्चात् पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने वैदिक विद्वानों के मन्त्रोच्चारण के साथ यज्ञ में आहुतियाँ डालकर अश्वमेध यज्ञ का शुभारम्भ किया | अश्वमेध यज्ञ के शुभारम्भ के पश्चात् आयोजित पत्रकार वार्ता में पूज्य शंकराचार्य जी महाराज ने अश्वमेध यज्ञ की महत्ता पर पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि आश्वलायन श्रौत सूत्र का कथन है कि जो सब पदार्थो को प्राप्त करना चाहता है, सब विजयों का इच्छुक होता है और समस्त समृद्धि पाने की कामना करता है, वह इस यज्ञ का अधिकारी है। इसलिए सार्वभौम के अतिरिक्त भी मूर्धाभिषिक्त ब्यक्तित्व अश्वमेध कर सकता है | यह अति प्राचीन यज्ञ होता है, क्योंकि ऋग्वेद के दो सूक्तों में अश्वमेधीय अश्व तथा उसके हवन का विशेष विवरण मिलता है। शतपथ तथा तैतिरीय ब्राह्मणों में इसका बड़ा ही विशद वर्णन उपलब्ध है, जिसका अनुसरण श्रौत सूत्रों, वाल्मीकीय रामायण महाभारत के आश्वमेधिक पर्व में तथा जैमिनीय अश्वमेध में किया गया है। वैसे भी यज्ञ विभाजित, असंगठित समाज को एकसूत्र में पिरोने का सबसे ससक्त माध्यम है | यज्ञ से सभी मनोरथों की प्राप्ति होती है |

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