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अल्लाह की बन्दगी और रोज़ादारों के लिए दस्तरख्वान को सजाने जैसी दोहरी ज़िम्मेदारी निभाती हैं औरतें

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। माहे रमज़ान मे औरतें एक साथ दोहरी ज़िम्मेदारी निभाती हैं। एक तरफ रोज़ादारों के लिए इफ्तार के सामान तय्यार करना तो दूसरी ओर रोज़ा रख कर नमाज़ तिलावत ए कलाम पाक और बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के बुज़ुर्गों जो किसी कारण रोज़ा नहीं रखते उनके लिए खाना तय्यार करना।सहरी से लेकर इफ्तारी और रात के खाने की ज़िम्मेदारी भी घर की औरतें ही निभाती हैं।ज़ाकिरा व मज़हबी मामलों की जानकार शैज़ी सय्यदा बताती हैं की यह बहोत बड़ी ग़लतफहमी है की ज़रा सी तकलीफ को अक्सर महीलाएँ रोज़ा न रखने का सबब बना लेती हैं और कहती हैं बाद मे छूटे रोज़े रख लेंगें।ऐसा हर्गिज़ नहीं।जान बूझ कर एक रोज़ा छोड़ने के ऐवज़ में साठ रोज़े रखने पड़ते हैं उपर से रोज़ा छोड़ने वाले दिन से पहले के रोज़े भी खटाई मे पड़ जाएँगे। औरतों को सिर्फ पीरियड्स और हामला होने के साथ अगर छोटे बच्चे को दूध पिला रही हैं तभी रोज़ा छोड़ने की इजाज़त है लेकिन बाद मे कज़ा के तौर पर एक एक रोज़ा रखना पड़ता है।

*दस्तरख्वान पर रखे खाने के सामान से पहले एक चुटकी नमक का सेवन दिलाता है तीस बिमारियों से छुटकारा*

उम्मुलबनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी ने दस्तरख्वान पर सजे खाने के एक लुक़मा मुँह मे रखने से पहले एक चुटकी नमक का सेवन करने से तीस तरहा की बिमारियों से महफूज़ रहने की हिकमत ए अली को लोगों से अपनी रोज़ की ज़िन्दगी मे अमल मे लाने की बात कही।कहा पैग़म्बरे इसलाम मोहम्मद ए मुसतफा (स०अ०व०) के दामाद और पहले इमाम हज़रत अली का क़ौल है की अगर खाने से पहले एक चुटकी नमक ज़बान पर रखने के बाद ही कोई ग़िज़ा ली जाए तो तीस तरहा की बिमारीयों से बचा जा सकता है। अस्करी ने बताया की ईरान मे यह रवाएज हर घर और हर दस्तरख्वान पर देखा जा सकता है।अरबईन के दिनो मे जब लाखों लोग दूसरे मुल्कों से ज़ियारत को ईरान व इराक़ की यात्रा पर.होते हैं तो वहाँ पर हज़ारों मील का निशुल्क दस्तरख्वान सजा रहता है। उस पर भी जगहाँ जगहा नमक भी रहता है।बड़े बड़े आलिमेदीन मरजा और ओलमा बिना एक चुटकी नमक खाने के कुछ नहीं खाते।

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