दारागंज स्थित लक्ष्मीनारायण मंदिर में भव्य पूजन
हवन कुंड से निकलने वाली ज्वाला में दिखती है दुर्गा का स्वरूप,दर्शनके लिए जुटे भक्त
( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दारागंज क्षेत्र में सबसे पुराने मंदिरों में विशेष मंदिर लक्ष्मी नारायण मंदिर मैं मैसूर से आए पुजारियों द्वारा विशेष अनुष्ठान का आयोजन चल रहा है ।लक्ष्मीनारायण मंदिर में कई दिनों से लगातार पूजनअर्चन एवं हवन किया जा रहा था, जिसका समापन रविवार को हुआ । इस दौरान भक्तों की भीड़ मंदिर में पहुंचती रही, मंदिर में स्थापित भगवान नारायण एवं मां लक्ष्मी की अद्भुत मूर्ति भक्तों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है। लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्रतिवर्ष वेद पाठी ब्राह्मणों के द्वारा
लक्ष्मीनारायण जी की भव्य पूजा की जाती है। साथ ही लगातार कई
दिनों तक यज्ञ हवन किया जाता है। इस वर्ष मैसूर से आये हुए ब्राह्मणों
ने पूजन एवं हवन किया, लगातार कई दिनों तक चले पूजन में आसपास के भक्तों की भीड़ पहुंचती रही। यज्ञ के मुख्य यजमान कर्नाटक के
अनंत सयनम ने बताया कि यह मंदिर चार सौ साल पुराना है। इसके बारे
में कहा जाता है कि राजा रेवा के स्वप्न में भगवान नारायण एवं माता लक्ष्मी आए और उन्होंने इस मंदिर के निर्माण के लिए कहा, जिसके बाद
राजा ने इस मंदिर का निर्माण कराया। राजा ने मूर्ति का निर्माण ठीक उसी
तरह से कराया जिस तरह से राजा को दर्शन हुए थे। अनंत सयनम ने
बताया कि उनके गुरू उन्हें इस मंदिर तक लाये, जिसके बाद से वह कुछ
वर्षों से मंदिर के जीर्णोद्धार के लिए प्रयास कर रहे हैं और वह प्रति वर्ष
मंदिर में यज्ञ, हवन पूजन कराते हैं।
भगवान नारायणके हाथमें चक्रके स्थानपर गदा आकर्षणका केन्द्र
लक्ष्मीनारायण मंदिर में स्थापित की गयी मूर्ति कई प्रकार से बाकी
मूर्तियों से अलग है, भगवान नारायण के दाहिने की तरफ उपर वाले हांथ
में प्रायः सुदर्शन चक्र होता है पर इस मूर्ति में गदा है जो कि भक्तों के
लिए काफी अलग और आकर्षक है, साथ ही भगवान नारायण गरूण
पर विराज मान है लेकिन गुरूण के साथ वासुकी भी हैं जो अन्य मंदिरों
में एक साथ देखने को नहीं मिलता है।
यज्ञसे उठने वाली लौ होती है अद्भुत
लक्ष्मी नारायण मंदिर में किए जाने वाले यज्ञ से उठने वाले लौ को देख
कर लोग आश्चर्य चकित रह जाते हैं, सामान्यतः यज्ञ की लौ उपर की
तरफ उठती है या फिर हवा के साथ थोड़ी इधर-उधर होती है। लेकिन
लक्ष्मी नारायण मंदिर में प्रतिवर्ष होने वाले यज्ञ से उठने वाली लौ बहुत
ही अद्भुत होती है, इस लौ में कई आकृतियां बनती दिखायी देती हैं, यह
के संरक्षक अनंत सयमन में बताया कि भगवान नारायण ने चार वेदों की
रचना की और ब्रह्मा जी को पहले वेद का ज्ञान देते समय लक्ष्मी हैव गृह
की चर्चा की जिसकी इस यज्ञ में प्रधानता रहती है, उन्होंने बताया कि
लक्ष्मी हैव गृह की आहूति के समय यज्ञ से जुड़े सभी देवी देवता जागृह
रहते हैं जिनसे मांगी हुई मन्नत पूरी होती है।



