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गंगापार सामूहिक हत्यायों का बना गार

नहीं थम रहा सिलसिला एक पखवारे ‌में एक दर्जन हत्यायो से दहला प्रयागराज

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज का गंगापार इलाका कभी मां गंगा की पवित्र अविरल धारा खिलखिलाती अठखेलियां करतीं लहरों की तरह शान्त और सौम्य रहता था,लेकिन अचानक से समुद्र मंथन से निकले हलाहल (विष) की तीव्र तीक्ष्णता से बुरी तरह पूरी गंध मारने लगा है निरंतर वीभत्स, दिल-दहलाने व कलेजा झकझोर देने वाले नृशंस सामूहिक हत्याकांडों से। मौत का ऐसा नग्न ताण्डव कि शैतान की भी रूह कांप जाये फिर इंसान की बिसात ही क्या।
किस कदर इन्सानियत को तार तार और शर्मशार करते हुए पुलिस के खौफ से बेखौफ इंसानियत के दुश्मन और हैवानियत पर आमादा नरपिशाचों ने विश्वप्रसिद्ध प्रयागराज में एक के बाद एक पूरे परिवार की दुस्सासहिक और रौंगटे खड़े कर देने वाले‌ सामूहिक हत्याओं को दनादन अंजाम दे रहे हैं, नृशंस हत्यायें करके खून की होली खेल रहे हैं। गौरतलब है कि गंगापार इलाके के लोगों के लिए शुक्रवार का दिन मनहूस साबित हो रहा है। एक ही हफ्ते के भीतर पांच पांच सामूहिक नरसंहार का साक्षी है रहा है शुक्रवार का दिन। पहली घटना में पांच सामूहिक हत्याओं को गंगापार इलाके के थाना नवाबगंज के खागलपुर गांव में 16 अप्रैल को शुक्रवार की मध्यरात्रि को बड़ी ही बेरहमी के साथ एक ही परिवार के पांच लोगों को धारदार हथियारों से काट डाला गया था।
और दूसरी बड़ी घटना 22 दिन शुक्रवार की ही मध्यरात्रि की गंगापार इलाके के थाना थरवई अन्तर्गत खेवराजपुर गांव की है। तारीखें जरूर बदल गई हैं मगर दिन और नरसंहार की भेंट चढ़े लोगों की संख्या और मारने का तरीका एक जैसा ही रहा है। 16 अप्रैल को मूलरूप से कौशाम्बी जनपद के थाना कोखराज गांव सिराथू का रहने वाला (42) वर्षीय राहुल तिवारी अपनी (38) वर्षीया पत्नी प्रीती तिवारी व तीन पुत्रियों माही (14) पीहू(8) सबसे छोटी बेटी कूहू(4) वर्षीया को साथ लेकर विगत छह महीने पहले नवाबगंज के खागलपुर गांव में एक रिटायर्ड फौजी के यहां किराये का कमरा लेकर रहने लगा था। खागलपुर अपना खुद का व्यवसाय करता था। 16 अप्रैल को उसकी पत्नी व बेटियों को कुल्हाड़ी और चापड़ से जानवरों की काटकर मार दिया गया खुद उसकी लाश फांसी पर लटकी मिली थी।
इस सनसनीखेज और दिल दहला देने वाली घटना से गांव समेत पुलिस के आलाधिकारियों के रौंगट खड़े हो गए थे। प्रारंभिक जांच पड़ताल के बाद शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।जांच के दौरान पुलिस ने
मृतक राहुल तिवारी के पास से 11 पन्नों का सुसाइड नोट बरामद किया था। इस सामूहिक हत्याकांड की गूंज प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कानों में भी गूंजी उन्होंने सूबे के आलाधिकारियों को सख्त आदेश सामूहिक हत्याकांड में शामिल हत्यारों शीघ्र गिरफ्तारी का दिया सात टीमों गठित कर कुछ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस के अनुसार राहुल तिवारी ने पहले अपनी पत्नी और बच्चों को बेरहमी से मार डाला फिर खुद ही फांसी के फंदे पर लटक गया था।अभी पूरी तरह उक्त केस का पर्दाफाश भी नहीं हो पाया था कि इसी सप्ताह के अंत में घटना की पुनरावृत्ति 22 अप्रैल को हो गई। ये दूसरा सामूहिक नरसंहार पुलिस विभाग के लिए “कोढ़ में खाज” वाली कहावत को चरितार्थ करता है। दिन फिर वही शुक्रवार इलाका भी गंगापार और मरने वालों की संख्या भी पांच मारने का ढंग भी वही? दूसरी सामूहिक हत्याकांड की घटना मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर दूर स्थित गंगापार के थाना थरवई गांव खेवराजपुर की है, जहां 22 अप्रैल शुक्रवार की रात को एक बार फिर से अधेड़ दम्पति की बहू,दिव्यांग बेटी और मासूमों का खून करके खूनी होली खेली गई। जिसने प्रदेश की भाजपा पर सरकार की कानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इतनी सख्त सरकार के बावजूद अपराध और अपराधियों के हौंसले बुलंद हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गंगापार इलाके में घटीं एक ही हफ्ते के अंदर दो परिवारों की सामूहिक नृशंस हत्यायें? 22 अप्रैल की रात को पेशे से गाय, भैंस का दूध बेचकर परिवार की आजीविका चलाने वाले 55 वर्षीय राजकुमार यादव व उसकी पत्नी कुसुम यादव( 50) बहू सविता यादव(30) पत्नी सुनील यादव,दिव्यांग बेटी मनीषा(25) और दो मासूम पोतियों साक्षी (5) मीनाक्षी (2) (यहां गौरतलब है कि किस्मत से बच गई साक्षी) के अलावा सभी को धारदार हथियारों से कसाई बने नरपिशाचों ने काट डाला। सिर्फ इतना ही नहीं राजकुमार यादव की बहू सविता और दिव्यांग बेटी मनीषा के साथ बलात्कार भी किया, हालांकि बलात्कार से पुलिस इंकार कर रही है, लेकिन घटनास्थल की सच्चाई चीख चीखकर ‌ये बयां कर रही थी कि सामूहिक हत्याकांड के पहले ननद और भाभी के साथ बलात्कार किया गया था? क्योंकि उनके निचले हिस्सों में कपड़े नहीं थे। हत्याकांड के पूर्व उनके साथ बलात्कार किया गया था कि नहीं इस बात की पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित कर लखनऊ भेजा गया है। जिसकी रिपोर्ट आने का इंतजार है, उक्त वीभत्स हत्याकांड के शीघ्र पर्दाफाश के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उसी शाम लखनऊ एसटीएफ को प्रयागराज के लिए रवानगी का आदेश जारी कर दिया था।
प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने 11पुलिस टीमें गठित कर हत्यारों की तलाश शुरू कर दी है, घुमंतू गिरोह का गंगापार इलाके में काफी संख्या में जमावड़ा है शक के आधार पर कई लोगों को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है।
परिवार में इकलौता बेटा सुनील यादव अपनी मासूम बच्ची साक्षी की तरह इसलिए बच गया कि वह शहर के प्रयाग स्टेशन पर पान की गुमटी लगाता था,और बघाड़ा स्थित अपने ननिहाल में सोता था। हफ्ते में एक दो बार ही अपने गांव खेवराजपुर आता जाता था घटना वाली रात भी सुनील किस्मत से घर नहीं था इसलिए बच गया उसके परिवार का सफाया करने के बाद दो वर्ष की अबोध दुधमुंही बच्ची मीनाक्षी के ऊपर भी हत्यारों को तरस नहीं आया था उसकी गर्दन भेड़ बकरी काट दी गई लेकिन मासूम साक्षी के प्राण इसीलिए बच गये कि शायद अंधेरे के कारण हत्यारों की क्रूर निगाहें उस पर नहीं पहुंच सकी थीं। अर्द्धरात्रि में मौत का नंगा ताण्डव होता रहा और पूरा गांव गहरी नींद सोता रहा। इतना सब कुछ घटित हो गया लेकिन किसी ने न कुछ देखा और ही कुछ सुना? यह अपने आप में एक ज्वलंत सवाल है। दोनों ही सामूहिक हत्याकांड सभी राजनीतिक पार्टियां मुददा बनाकर सियासी रोटियां सेंकने में लगी हुई हैं। बरहाल अपना परिवार खो चुके सुनील यादव का रो रोकर बुरा हाल है उसकी तो पूरी दुनियां ही उजड़ गई है,अब उसके जीने का एकमात्र सहारा उसकी नन्ही परी साक्षी बची है। सुनील ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से सीबीआई जांच करवाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की इच्छा जाहिर की है उसे लोकल पुलिस व फोर्स पर भरोसा नहीं है। 25 अप्रैल को उसने अपने दिये एक बयान में सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा है कि उसकी पत्नी का एक डेयरी वाले से प्रेम प्रसंग था,इस सामूहिक हत्याकांड में उसका भी हांथ हो सकता है। पुलिस ने उसकी मृतक के आशिक को भी गिरफ्तार कर लिया है और गहन पूछताछ कर रही है।
अंत में सिर्फ इतना ही कहना है कि शांत प्रयागराज शहर अपराध और अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है।

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