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ज्येष्ठ पूर्णिमा पर गिरिराज जी का हुआ महाभिषेक

 

16 हजार लीटर यमुना जल से किया गया महाभिषेक

*मटकों में यमुना जल लेकर पहुंचे भक्तजन*

मथुरा ( अनुराग दर्शन समाचार )। गोवर्धन में ज्येष्ठ पूर्णिमा पर गिरिराज जी का यमुना जल से महाभिषेक आयोजन धूमधाम से किया गया। दो टैंकरों में मथुरा से भर कर लाया गया करीब 16 हजार लीटर यमुना जल को मिट्टी के मटकों में भर कर गिरिराज महाराज पर चढाने के लिए भक्तो का तांता लग गया। पहली बार आयोजित इस अनूठे आयोजन में सुबह सात बजे से दोपहर 11 बजे तक गिरिराज जी का अभिषेक हुआ। गोवर्धन परिक्रमा के जतीपुरा स्थित इंद्र पूजा स्थल पर गिरिराज जी के ज्येष्ठाभिषेक के दौरान द्वापर युगीन गिरिराज पूजा का नजारा जीवंत हो गया। मान्यता है कि ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही नंद बाबा ने भगवान श्री कृष्ण का अभिषेक कर उनको राज पाट का उत्तराधिकार सौंपा था। राजस्थान के पोखरण से गिरिराज तलहटी के जतीपुरा में रह कर सखी रूप में गौ गोपाल व ब्रजवासियों की सेवा में जुटे पुष्टिमार्गीय संत सखी महाराज द्वारा जतीपुरा के इंद्र पूजा स्थल पर आयोजित इस विशाल ज्येष्ठाभिषेक में जमकर आनंद की बरसा हुई। मंगलवार को इस विशाल महाभिषेक आयोजन की सूचना पर देश के कोने कोने से जतीपुरा पहुंचे भक्तो ने मटकियो में यमुना जल भर पुरुशूक्त मंत्रों पर पुष्करणा ब्राह्मणों सहित गिरिराज जी का अभिषेक किया। केसर व गुलाब जल मिश्रित यमुना जल की सुगंध से तलहटी का वातावरण भी शीतल हो गया। आयोजन में जतीपुरा, आन्योर, गोवर्धन सहित आस पास के गिरिराज भक्तो ने भी पहुंच कर अभिषेक किया। ज्येष्ठाभिषेक के आयोजक संत सखी महाराज ने बताया कि तलहटी में विशाल स्टार पर ये आयोजन पहली बार गिरिराज जी की प्रेरणा से ही हो रहा है। ज्येष्ठ में गर्मी भी अधिक होती है इसलिए गिरिराज जी को यमुना जल में केसर व गुलाब जल मिला कर शीतलता प्रदान कराई जा रही है। मंदिर सेवाधिकारी किश्नो मुखिया व पवन मुखिया ने बताया कि गिरिराज तलहटी में ये आयोजन विशाल स्तर पर पहली बार हो रहा है। सभी भक्त रोमांचित हो कर उत्साह के साथ जलाभिषेक कर रहे थे।
एक किलो केसर व सलाह हजार लीटर यमुना जल का हुआ प्रयोग
संत सखी महाराज के अनुसार जतीपुरा के इंद्र पूजा स्थल पर गिरिराज महाराज के ज्येष्ठाभिषेक में मथुरा से यमुना जल के दो टैंकरों में भरकर करीब सोलह हजार लीटर यमुना जल मंगवाया गया था। यमुना जल को टैंकर से इंद्र पूजा स्थल गिरिराज जी तक पहुंचने के लिए 1008 मिट्टी के मटकों की व्यवस्था की गई थी। यमुना जल में करीब एक किलो केसर चूर्ण व करीब पचास लीटर गुलाब जल का प्रयोग किया गया था। जिससे गिरिराज जी को शीतलता मिल सके।

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