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VIDEO: किन्नर अखाड़े का जूना में नहीं होगा विलय, स्वतंत्र अस्तित्व के साथ रहेंगे संग

आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने की घोषणा
प्रयागराज 8 जनवरी। कुंभ मेले में शामिल होने के लिए पहली बार संगम की रेती पर पहुंचा किन्नर अखाड़ा किसी भी दूसरे अखाड़े मैं विलय नहीं करेगा।

उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है और वह आगे भी बना रहेगा। हां, इतना जरूर है कि किन्नर अखाड़ा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित पंच दशनाम जूना अखाड़ा के साथ परस्पर समानता के भाव के साथ रहेगा।

यह बातें किन्नर अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने अपने अखाड़े के जूना अखाड़े में विलय को लेकर चल रही चर्चाओं के संदर्भ में यूनाइटेड भारत प्रतिनिधि से बात करते हुए कहीं। आचार्य महामंडलेश्वर ने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा और संवर्धन के लिए एक संकल्प के साथ किन्नर अखाड़ा की स्थापना की गई है अखाड़े की अपनी कुछ शर्तें और मान्यताएं हैं जिनके साथ समझौता नहीं किया जा सकता।

हम जूना अखाड़े से वैचारिक समानता के चलते स्वतंत्र अस्तित्व के साथ जुड़ेंगे। किन्नर अखाड़ा के साथ ‘अखाड़ा’ शब्द जुड़ा रहेगा और आचार्य महामंडलेश्वर, महामंडलेश्वर और पीठाधीश्वर आदि पद यथावत बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किन्नर अखाड़े की किसी अन्य अखाड़े से कोई शत्रुता नहीं है, वह सभी के साथ प्रेम और सौहार्द का भाव रखता है।

कोई दूसरा उनके बारे में क्या सोचता है वह इसकी परवाह नहीं करते हैं। जूना अखाड़े के संरक्षक श्रीमंत हरिगिरी जी से उनके पुराने संबंध है ऐसे में उनसे भेंट मुलाकात होती रहती है। इसका कोई और मतलब निकालना उचित नहीं है। किन्नर महामंडलेश्वर ने प्रयागराज की धरती पर मिले सम्मान के लिए यहां के लोगों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि लोगों का यही सम्मान उनकी थाती है। इसी से मिलने वाली शक्ति से वह और उनका अखाड़ा सनातन धर्म की रक्षा के लिए कार्य करते रहेंगे।

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